जिलाधिकारी पंकज यादव ने गुरुवार को सुबह साढ़े आठ से लेकर रात आठ बजे तक बैठकों का दौर जारी रखा। एक के बाद एक हुई बैठक में डीएम के तेवर तल्ख रहे। किसान बंधु की बैठक में किसानों ने केसर चीनी मिल बहेड़ी पर करीब 45 हजार गन्ना किसानों के 85 करोड़ का बकाया भुगतान न होने का मुद्दा उठा तो डीएम सख्त हो गए। उन्होेंने कहा कि चीनी बेचकर किसानोें का भुगतान क्यों नहीं कराते, इस सवाल के जवाब में जिला गन्ना अधिकारी (डीसीओ) ठीक से जवाब नहीं दे पाए। डीएम ने फटकारते हुए कहा कि सरकार की नौकरी करते हो और पैरवी मिलों की कर रहे हो। चेताया कि यही हाल रहा तो निलंबन को लिख दूंगा। डीएम ने किसानों के सामने डीसीओ शैलेंद्र कुमार मौर्य से कहा कि जब चीनी किसानों के गन्ने की बन रही है तो इस चीनी को बेचकर किसानों के गन्ने का भुगतान क्यों नहीं होगा। बैंक को चीनी बंधक बनाने का अधिकार नहीं है। बैंकों ने मिल के लिए कर्जा दिया है तो ऋण की एवज में मिल की मशीन और जमीन को बंधक बनाएं। यदि पहले इस तरह के किसी मामले को लेकर हाईकोर्ट में अवमानना हुई है तो उसकी ठीक से पैरवी करें। बैंक प्रबंधक को बुलाएं और उनको नियमों की जानकारी देकर मिल की जमीन तथा मशीन बंधक बनवाई जाए। बैठक के दौरान किसानों ने लीड बैंक प्रबंधक की जमकर खिंचाई की। उन्होंने कहा कि कर्जे के लिए 12 साला बनवाने को वकील के नाम पर दो से पांच हजार रुपये लिए जा रहे हैं। बोले-ऐसा क्यों? जिला मुख्यालय से एक मुश्त फीस निर्धारित की जाए। किसानों की शिकायत को लीड बैंक प्रबंधक ने गंभीरता से लिया और कहा कि लिखित शिकायतों के आधार पर बैंक प्रबंधकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों की बैंक के अधिकारियों से जांच कराई जाएगी। किसान बंधु बैठक में नलकूप, मंडी और बिजली विभाग के अधिकारियों के न होने के कारण इन विभागों से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा नहीं हो पाई। अब इन समस्याओं के लिए किसानों को अगली बैठक का इंतजार करना होगा। डीएम इन विभागों के अधिकारियों से तीन दिन में जवाब मांगा है।