बरेली। सर्दियों की दस्तक के साथ ही अलाव का मुद्दा फिर सुलग उठा है। लकड़ियों की आपूर्ति के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है। अब तक चार फर्में सामने आई हैं। बीते वर्ष नाले की सफाई करने वाली फर्म को 5,400 क्विंटल लकड़ियों की आपूर्ति का ठेका दे दिया गया था।
कम दर पर ठेका होने की वजह से फर्म ने बीच में ही लकड़ियों की आपूर्ति से हाथ खड़े कर दिए थे। कई जगह गीली लकड़ियां पहुंचने की वजह से लोगों को परेशानी हुई थी। इसलिए इस बार नगर निगम फूंक-फूंककर कदम रख रहा है। रेट से लेकर विवादित फर्मों पर भी नजर रखी जा रही है।
दरअसल, लकड़ियों का टेंडर तीन साल से सुर्खियों में रहा है। इसी मामले में तत्कालीन एक्सईएन दिलीप कुमार शुक्ला का तबादला हो गया था।
इन मामलों से नगर निगम के अधिकारियों ने सबक लिया है। नगर आयुक्त ने कहा है कि इस बार लकड़ी की टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता रहेगी।
विवादित फर्म को टेंडर नहीं दिया जाएगा। फर्म के भुगतान में भी कोताही नहीं बरती जाएगी। टेंडर डालने वाली फर्मों का मूल्यांकन किया जा रहा है। इसके बाद निर्णय लिया जाएगा। संवाद