आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से क्यूआर कोड बनाने की बात आ रही सामने
बरेली। सितंबर में शास्त्री मार्केट स्थित एजेंसियों से लिए गए 33 सैंपल को संबंधित कंपनियों को भेजकर दवा की गुणवत्ता आदि की रिपोर्ट मांगी गई है। इसके अलावा नौ सैंपल लखनऊ स्थित प्रयोगशाला भेजे गए हैं। सहायक आयुक्त औषधि संदीप कुमार के मुताबिक, इन सैंपलों की रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। हैप्पी मेडिकोज के यहां पूर्व में जब्त की गई 6.30 लाख रुपए की दवाओं के संबंध में अभी निर्णय होना बाकी है।
औषधि निरीक्षक अनामिका जैन के मुताबिक, गुनिना फार्मास्युटिकल्स से एलेग्रा-120, कायमोरल फोर्ट समेत अन्य एंटीबायोटिक, एंटी डायबिटिक, एंटी एलर्जिक दवाएं बरामद हुई थीं। सिक्किम स्थित सनोफी कंपनी के नाम से एलेग्रा-120 दवा को भी थोक विक्रेताओं ने बेचा है। इसकी 2600 गोलियां कार्रवाई के दौरान बरामद हुई थीं। इनका बैच नंबर पांच-एनजी 001 है। मुंबई की कंपनी एबॉट की यूडीलिव टेबलेट मिली हैं। सिपला समेत अन्य कंपनियों की अटैरक्स, जैनुमेट, जालरा आदि भी मिली हैं। इनके संबंध में विस्तृत जांच चल रही है। ब्यूरो
ब्रांडेड फर्म के सुरक्षा फीचर में सेंध
सहायक आयुक्त औषधि ने कहा कि यह तय है कि दवा माफिया ने ब्रांडेड कंपनियों के सुरक्षा फीचर में सेंधमारी की। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से नकली क्यूआर कोड बनाने की बात सामने आ रही है। विक्रेता ने एक ही बैच नंबर पर एंटी एलर्जिक, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, एंटीबायोटिक, खांसी समेत कई दवाएं बाजार में खपा दी। नकली दवा की बिक्री करने वाले थोक विक्रेताओं के विरुद्ध कार्रवाई जारी है।