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Bareilly News: ताश के पत्तों की तरह बिखरी विवेचना, साबित नहीं हुए आरोप, धर्मांतरण मामले में दो युवक बरी

Sat, 03 Aug 2024 07:17 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

बरेली में धर्मांतरण के मामले में अदालत ने दो आरोपियों को बरी कर दिया। इस मामले में उपरोक्त दोनों पर लगाए गए आरोप साबित नहीं हुए।  
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली में धर्मांतरण के जिस मामले में अदालत ने दो आरोपियों को बरी किया है, उसके ट्रायल के दौरान पुलिस की विवेचना ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। आरोप साबित नहीं हो सके। एफआईआर में जिस पवित्र ग्रंथ (बाइबिल) की बरामदगी आरोपी के पास से दिखाई गई, विवेचक ने उसे वादी से बरामद होना दिखाया।

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आरोपियों की गिरफ्तारी सात अक्तूबर 2022 को दिखाई गई, जबकि गवाही के दौरान सभी गवाहों ने 29 मई 2022 को गिरफ्तारी की पुष्टि की। 30 मई 2022 को बिथरी पुलिस ने हिमांशु पटेल की तहरीर पर गोरखपुर निवासी अभिषेक गुप्ता के खिलाफ धर्मांतरण की रिपोर्ट दर्ज की थी। बिथरी निवासी कुंदन का नाम पुलिस ने विवेचना में जोड़ा था। 

पुलिस ने वादी से दिखाई थी बाइबिल की बरामदगी
एफआईआर में दिखाया गया था कि धर्म परिवर्तन कराने वाले आठ लोग व अभिषेक गुप्ता के पास से बाइबिल बरामद हुई थी। मुकदमे में आठ बाइबिल का जिक्र था, वहीं पुलिस ने वादी यानी हिमांशु के पास से बाइबिल की बरामदगी दिखाई। जबकि, हिमांशु ने अपने बयान में कहा कि बाइबिल उनके पास से नहीं मिली। 
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इस पर न्यायाधीश ने टिप्पणी की है कि पवित्र धर्मग्रंथ बाइबिल की बरामदगी अभियुक्त से नहीं, वादी से हुई है, जो विधि विरुद्ध है। घटनास्थल पीपल के पेड़ के निकट बताया गया था, जबकि नक्शा नजरी में इसका कोई उल्लेख नहीं। 

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जहां घटना हुई, वहां आस-पास का कोई गवाह नहीं बनाया गया। सभी गवाह 10 किलोमीटर दूर के थे। गिरफ्तारी तक को लेकर पुलिस के पास कोई जवाब नहीं था। दूसरे आरोपी कुंदनलाल का किसी गवाह ने नाम ही नहीं लिया, फिर भी पुलिस ने उसे अभियुक्त बना दिया। विशेष लोक अभियोजक को भी कहना पड़ा कि विवेचना में कोई दम नहीं।

आरोपी चाहें तो दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज करा सकते हैं वाद : कोर्ट
अपर सत्र न्यायाधीश ज्ञानेंद्र त्रिपाठी ने अपने फैसले में कहा कि तत्कालीन थानाध्यक्ष बिथरी चैनपुर, विवेचक व आरोपपत्र के अनुमोदनकर्ता सीओ के विरुद्ध कार्यवाही की जाए, ताकि सभ्य समाज के सदस्यों की सुरक्षा संभव हो सके। 

न्यायाधीश ने लिखा है कि अगर आरोपी चाहें तो वादी मुकदमा हिमांशु पटेल, अन्य साक्षीगण व दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध दुर्भावनापूर्ण दांडिक अभियोजन के लिए सिविल वाद दर्ज कराकर प्रतिकर का दावा कर सकते हैं। वजह यह है कि इन लोगों की वजह से ही अभिषेक की नौकरी चली गई। साथ ही उसे आर्थिक व सामाजिक हानि भी झेलनी पड़ी।
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