जहां घटना हुई, वहां आस-पास का कोई गवाह नहीं बनाया गया। सभी गवाह 10 किलोमीटर दूर के थे। गिरफ्तारी तक को लेकर पुलिस के पास कोई जवाब नहीं था। दूसरे आरोपी कुंदनलाल का किसी गवाह ने नाम ही नहीं लिया, फिर भी पुलिस ने उसे अभियुक्त बना दिया। विशेष लोक अभियोजक को भी कहना पड़ा कि विवेचना में कोई दम नहीं।
आरोपी चाहें तो दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज करा सकते हैं वाद : कोर्ट
अपर सत्र न्यायाधीश ज्ञानेंद्र त्रिपाठी ने अपने फैसले में कहा कि तत्कालीन थानाध्यक्ष बिथरी चैनपुर, विवेचक व आरोपपत्र के अनुमोदनकर्ता सीओ के विरुद्ध कार्यवाही की जाए, ताकि सभ्य समाज के सदस्यों की सुरक्षा संभव हो सके।
न्यायाधीश ने लिखा है कि अगर आरोपी चाहें तो वादी मुकदमा हिमांशु पटेल, अन्य साक्षीगण व दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध दुर्भावनापूर्ण दांडिक अभियोजन के लिए सिविल वाद दर्ज कराकर प्रतिकर का दावा कर सकते हैं। वजह यह है कि इन लोगों की वजह से ही अभिषेक की नौकरी चली गई। साथ ही उसे आर्थिक व सामाजिक हानि भी झेलनी पड़ी।