आपस में बैठक करते पुलिस के आलाधिकारी।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
लॉकडाउन आगे बढ़ने के बाद फंसे लोगों के गंतव्य पर निकलने की आशंका में बढ़ाई एहतियात
बरेली। लॉकडाउन बढ़ने पर दूसरे जिलों में फंसे लोग कहीं अपने गंतव्य के लिए न निकल पड़े.. इसलिए निगरानी और तेज की जाएगी। शासन ने प्रदेश के सभी रेंज अफसरों को इसकी पुख्ता व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। डीआईजी बरेली को उत्तराखंड से जुड़े बरेली और नेपाल से जुड़े पीलीभीत की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने के बाद 21 मार्च को पूरे देश में जनता कर्फ्यू के बाद 21 दिनों तक संपूर्ण लॉकडाउन होने की भी घोषणा कर दी गई थी। इसके बाद दफ्तर-बाजार बंद होने के कारण दूसरे जिलों में रुके लोग अपने घरों को लौटने लगे थे। इसके चलते संक्रमण फैलने का खतरा और भी बढ़ गया था। इसे रोकने के लिए लोगों के जत्थों को उसी स्थान पर शेल्टर होम बनाकर रोक दिया था। जिलों की सीमाएं भी सील कर दी गई थीं। लॉकडाउन आगे बढ़ने पर ये लोग कहीं अपने गंतव्य के लिए न निकल पड़ें.. इसकी निगरानी और तेज करने के आदेश दिए गए हैं। शासन ने प्रदेश के सभी रेंज अफसरों को ऐसे लोगों को शेल्टर होम व अन्य स्थानों पर ही रोकने के निर्देश दिए गए हैं। बरेली रेंज के डीआईजी राजेश कुमार पांडेय को बरेली से जुड़े उत्तराखंड व पीलीभीत से जुड़े नेपाल के करीब 54 किमी के बार्डर की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
‘जिलों की सीमाओं पर निगरानी की जा रही है। हाईवे के अलावा जंगलों व गांव के रास्तों पर भी फोर्स तैनात है। पीलीभीत की तरफ रुके अधिकतर लोग मजदूर वर्ग के हैं। इसके चलते कच्चे रास्तों पर भी पहरा बैठाया गया है।’
- राजेश कुमार पांडेय, डीआईजी रेंज