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Bareilly News: रुविवि में वित्तीय अनियमितताओं का जिन्न आया बाहर, शासन ने किया जवाब-तलब

Fri, 26 Apr 2024 05:04 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
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बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में अब वित्तीय अनियमितताओं का पुराना जिन्न बाहर आ गया है। इसके तहत बीते वर्ष पूर्व वित्त अधिकारी ने वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कुलपति पर भुगतान के लिए दबाव बनाने संग कई अन्य आरोप लगाए थे। आरोपों को लेकर दो बार जवाब नहीं देने पर अब शासन ने मामले में कुलसचिव और वित्त अधिकारी से संयुक्त रूप से आख्या मांगी है।
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मामला बीते वर्ष का है। विश्वविद्यालय के पूर्व वित्त अधिकारी केके शंखवार को 10 जनवरी 2023 को पद से हटाते हुए कार्यालय निदेशक कोषागार से संबद्ध किया गया था। तब उन्होंने विश्वविद्यालय में हो रहीं अनियमितताओं को लेकर राजभवन पत्र भेजा था। कहा था कि, विवि में स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के तहत विभिन्न शैक्षिक और शिक्षणेत्तर पदों के संबंध में मानक निर्धारित किए गए हैं। शासन के निर्देशानुसार विश्वविद्यालयों में स्ववित्त पोषित पाठ्यक्रमों से होने वाली आय का लेखा-जोखा अलग रखा जाता है। साथ ही आय-व्यय को विश्वविद्यालय के बजट में अलग से प्रदर्शित किया जाता है, लेकिन कुलपति स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों सहित अन्य के वेतन भुगतान के लिए संयुक्त वेतन खाता खुलवाना चाहते थे। हालांकि नियम विरुद्ध होने से संयुक्त खाता नहीं खोला गया। वित्त नियंत्रक ने आरोप लगाया कि इसके अलावा कोरोना किट खरीद के भुगतान को लेकर भी कुलपति ने दबाव बनाया था। वित्त नियंत्रक ने इसकी शिकायत राजभवन में की।
वर्तमान कुलसचिव अजय कृष्ण यादव के अनुसार पूर्व वित्त नियंत्रक की शिकायत को राजभवन ने शासन को भेज दिया था। इस पर शासन ने पिछले वर्ष मार्च और अक्तूबर में विवि से जवाब मांगा था, लेकिन उस समय विवि ने जवाब नहीं दिया। इसीलिए अब फिर 19 अप्रैल को शासन स्तर से जवाब मांगा गया है।
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शिकायत में लगाए गए हैं गंभीर आरोप
पूर्व वित्त अधिकारी ने शिकायत में कई गंभीर आरोप लगाए हैं। कहा है कि, बीएड प्रवेश परीक्षा 2022 से संबंधी गोपनीय मदों के भुगतान के लिए 50.50 करोड़ रुपये अग्रिम तीन किस्तों में लिए गए। प्रथम किस्त में 30, दूसरी में 18 और तीसरी किस्त में 2.50 करोड़ का समायोजन प्रस्तुत नहीं किया गया। इसमें वित्तीय अनियमितता की गई। पूर्व वित्त अधिकारी ने इसकी जांच की मांग की थी। आरोप था कि स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के तहत कार्यरत शिक्षकों की कॅरिअर एडवांसमेंट स्कीम के तहत पदोन्नतियां किए जाने से भुगतान असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हुई। विवि में नियुक्ति के लिए शैक्षिक पदों के विज्ञापन जारी किए गए और इनमें सेल्फ फाइनेंस कोर्स के शैक्षिक पदों को भी शामिल किया गया, लेकिन विज्ञापन में स्पष्ट नहीं किया गया कि कौन से पद स्ववित्तपोषित हैं और कौन से पद नियमित? संघटक कॉलेजों में भी नियुक्तियां कर दी गईं, लेकिन पद सृजन की कार्रवाई नहीं की गई।



विश्वविद्यालय में पूर्व के वित्त अधिकारी ने राजभवन पत्र भेजा था। इसका जवाब दिया जा चुका है। प्रकरण समाप्त हो चुका है। सभी बातें आधारहीन पाई गई थीं।
-डॉ. अमित सिंह, मीडिया प्रभारी, रुहेलखंड विश्वविद्यालय

शासन से पूर्व वित्त अधिकारी की शिकायत पर कुलसचिव व वित्त अधिकारी से संयुक्त रूप से जवाब मांगा गया है। संबंधित को पत्र भेजकर दस्तावेज मांगे गए हैं। जल्द जवाब भेजा जाएगा।
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अजय कृष्ण यादव, कुलसचिव
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