बरेली। सन सिटी के शिव मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथाव्यास नारायण प्रपन्नाचार्य महाराज ने श्री कृष्ण व सुदामा की मित्रता का प्रसंग सुनाया गया। भागवत कथा का महत्व समझाते हुए कहा कि कथा में कही गई बातों को आचरण में लाना और जीवन को सफल बनाना आवश्यक है। कथा न केवल परिवार को कल्याण की ओर ले जाती हैए बल्कि समाज भी सुधरता है।
कथा मर्मज्ञ ने कहा कि श्री कृष्ण के बचपन के मित्र सुदामा का जीवन आर्थिक संकट में गुजर रहा था। पत्नी के कहने पर एक दिन सुदामा मुट्ठीभर चावल लेकर बचपन के मित्र श्री कृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे। द्वारपालों को परिचय दिया कि वह श्री कृष्ण के बचपन के मित्र हैं और मिलने आए हैं। द्वारपालों को भरोसा न हुआ पर आग्रह किया तो द्वारपाल राजमहल में गए। भगवान श्रीकृष्ण को सूचना दी। सुदामा का नाम सुनते ही श्री कृष्ण सिंहासन से उठकर नंगे पांव द्वार की ओर दौड़ पड़े। सुदामा को गले लगाया। अंदर ले आए। भावुक हो गए। अपने आंसुओं से सुदामा के पांव पखारे। घर का हालचाल पूछा। तब सुदामा ने उन्हें पत्नी की ओर से दिए गए चावल सौंपे। भगवान ने तीन हिस्से में ग्रहण किया। चौथी बार खाने को हुए तो रुक्मिणी ने रोक दिया। चावल अपने लिए मांगे और फिर भंडारगृह में डलवा दिए। इसके बाद श्री कृष्ण ने सुदामा की झोपड़ी की जगह महल का निर्माण कराया। बाद में मित्र को छोड़ने के लिए द्वारका से सुदामापुरी तक गए। अंत में कथा मर्मज्ञ ने यदुवंश के पराभव का प्रसंग सुनाया। कथा में विजय कुमार वैश्य, प्रमोद कुमार वैश्य, अशोक कुमार वैश्य, दिनेश कुमार अग्रवाल, जगदीश चंद्र सक्सेना आदि का सहयोग रहा।