इनमें रंग ही रंग हैं, खुशबू भी है और ताजगी इतनी है कि ऊर्जा भर देते हैं। कभी लगता है अपनी सुंदरता पर इतरा रहे हैं। जैसे प्रकृति ने अपनी कूची से इनमें सारे रंग भर दिए हों। निर्णायक भी असमंजस में हैं कि कैसे किसी एक को बेहतर बताएं। शनिवार को सुबह से अमर उजाला परिसर में पुष्प प्रेमियों में इनका नजारा लिया। मेयर डॉ. आईएस तोमर के अलावा शहर के कई गण्यमान्य लोग भी प्रर्दशनी देखने पहुंचे।
अमर उजाला में लगी पुष्प प्रदर्शनी में एक से बढ़कर एक वैरायटी के फूल हैं। दो हजार प्रविष्टियाें में जज सबसे सुंदर और अलग दिखने वाले फूलों को छांट रहे हैं। निर्णायक मंडल का कहना है कि इस बार न केवल फूलाें की सुंदरता बल्कि उनकी सेहत भी देख रहे हैं। जज बरेली कॉलेज के डॉ. आलोक खरे, आईवीआरआई से डॉ. रंजीत सिंह और एसआर इंटरनेशनल से अल्पना जोशी पूरे परिसर में घूमकर उनकी परक की। मासूम बचपन और अनुभवी बुजुर्ग सभी फूलों को छूकर एक एहसास पाना चाहते हैं। सेल्फी लेने वालों की होड़ दिखी। युवा और महिलाआें ने अपने पसंद के फूल चुन लिए और उनको अपने कैमरे के कैद किया। परिणाम सुरक्षित रख लिए गए हैं। मंडल ने गार्डन वर्ग में प्रतिभागियों के घर और संस्थानों का दौरा भी किया। प्रतियोगिता के हर वर्ग में प्रतिभागियों को पुरस्कार व प्रशस्ति पत्र दिए जाएंगे। अमर उजाला निर्णायक मंडल का निर्णय अंतिम व सर्वमान्य होगा। लेकिन निराश न हो, क्याेंकि फूल भी निराश नहीं होते। सपा जिलाध्यक्ष शुभलेश यादव, जफर बेग, प्रमोद बिष्ट, रविंद्र यादव और विवेक भारती ने भी फूलाें के बीच समय बिताया।
- इनका कोई जवाब नहीं
रीथ बुके में लोगों ने अपनी प्रतिभा दिखाई। क्रिएटिविटी में पुराने टायराें से गमले बनाकर पेश किए तो फूलों के हनुमान बनाए गए हैं। सूखे टहनियों से कलाकृति बनाई गई है। क्लैन्थस के फूल आंख लग रहे हैं तो हथेली के बराबर डहेलिया ने दिल जीत लिया। रैन्नकुलस और ऑर्किड की अलग शान दिखी। कारनेशन देखकर लगा किसी बच्चे ने पैंसिल को शार्प कर रोप दिया। लूपन अपनी दो दिन की जिंदगी के खूबसूरत पल को दिखा रहा है और जरबेरा बता रहा है कि जब तक जियो खिले रहो। काला गुलाब होता नहीं, लेकिन इतना लाल हो गया कि रंग ही काला पड़ गया। कलसोरेनिया के फूल देखकर उनको छूने का मन कर रहा है, ये गुब्बारे की तरह लग रहे हैं।
- हाईब्रिड फूलों की खूबसूरती देखें
सेना में 1986 से माली शिवपाल बताते हैं कि अधिकतर फूलों की वैरायटी हाइब्रिड हैं। फ्रिजिया में आपको खूबसूरत फूल दिखेगा तो डिमोर पोर्ट में आपको सफेद और पीले के बाद बैंगनी रंग की छटा इस बार दिखेगी। पेपर फ्लावर सरीखे दिखने वाले फूलों को अगर आप साल भर भी अपने फ्लावर वास में रखेंगे तो भी ये खराब नहीं होंगे।
फूलाें के राजा की संख्या कम है
प्रदर्शनी में अधिकतर गुलाब कैंफर से आए हैं। इनमें भी गमलों में बोए गए गुलाब कम हैं। शिवपाल बताते हैं कि अब गुलाबों को गमलों में बोने का चलन कम हो गया है। अगर आपके पास थोड़ी सी जमीन है तो इसे कच्ची जगह पर लोग बो रहे हैं, गमलाें में गुलाब का विकास रुक रहा है। इसलिए प्रदर्शनी में गुलाब नहीं दिख रहे हैं।
- कैक्टस और बोंजाई का जवाब नहीं
मनीहारन गली में रहने वाले हरीश भल्ला के घर में 50 से अधिक बोन्जाई हैं। अब तक कई प्रतियोगिताआें में प्रथम स्थान भी इस वर्ग में पाते रहे हैं। माली शिवपाल बताते हैं कि बोंजाई बनाना ज्यादा महंगा नहीं है। ढाई फिट का बोंजाई ही सबसे आदर्श है, इससे ज्यादा बड़ा होने पर वह पेड़ की श्रेणी में आ जाएगा। बोन्जाई देने के लिए शेप दें, वायटिंग करें और रोडपूनिंग करनी है। जड़ों की कटिंग जरूरी है।
- पुरस्कार वितरण आज
विजेताओं की घोषणा रविवार को अमर उजाला परिसर में होगी। प्रतिभागियाें को सम्मानित किया जाएगा। सभी प्रतिभागी शाम पांच बजे तक परिसर में अवश्य पहुंचे।