बरेली। आगरा की ब्लैक लिस्ट फर्म परमार कंस्ट्रक्शन को ठेका देने के मामले में जांच समिति ने नगर आयुक्त को रिपोर्ट सौंप दी हैं। हालांकि नगर आयुक्त ने इस रिपोर्ट का खुलासा नहीं किया है। उन्होंने कहा है कि फर्म को नोटिस भेजकर तीन दिन में जवाब मांगा गया है, इसके बाद कार्रवाई के साथ रिपोर्ट का भी पूर्ण रूप से खुलासा किया जाएगा। वहीं नगर निगम सूत्रों की माने तो फर्जी दस्तावेजों के आधार उद्यान विभाग 5.28 करोड़ का टेंडर लेने का मामले का खुलासा हो गया है। वहीं अब टेंडर रद्द की कार्रवाई भी हो सकती है।
आगरा की परमार कंस्ट्रक्शन फर्म को 2023 में शहर के सभी डिवाइडर, पार्काें और रोड किनारे पेड़ों के रखरखाव का 5.28 करोड़ टेंडर मिला था। इसमें फर्म को 125 लोगों को लगाकर काम करना था। एक वर्ष बीत जाने के बाद फर्जीवाड़ा पकड़ में आया तो नगर आयुक्त ने मामले में जांच बैठा दी। आरोप है कि 2020 में स्मार्ट सिटी के टेंडर लेने के लिए आगरा विकास प्राधिकरण का फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों को लगाया गया था। इसमें दस्तावेजों की जांच के दौरान मामला पकड़ में आया तो फर्म को ब्लैक लिस्ट किया गया था। इसके बाद 2023 में उसी फर्म को ठेका दे दिया गया। उद्यान विभाग के इस टेंडर के दौरान अपर नगर आयुक्त सुनील कुमार यादव समेत सहायक लेखा अधिकारी हृदय नारायण और पर्यावरण अभियंता राजीव कुमार राठी ने दस्तावेजों की जांच पड़ताल की थी, जिसके बाद टेंडर हुआ। इस प्रकरण का खुलासा होने पर नगर आयुक्त ने उपनगर आयुक्त पूजा त्रिपाठी, मुख्य अभियंता मनीष अवस्थी और लेखाधिकारी अनुराग सिंह की जांच कमेटी गठित की थी। टीम ने मामले की रिपोर्ट सौंप दी है। वहीं फर्म को रिपोर्ट के आधार पर तीन दिन में जवाब देने के लिए नोटिस भेजा गया है।
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5.28 करोड़ के टेंडर में गड़बड़ी के मामले में जांच कमेटी ने रिपोर्ट सौंप दी है। संबंधित फर्म को नोटिस भेज तीन दिन में जवाब मांगा है। इसके बाद मामले में रिपोर्ट का खुलासा कर मामले में कार्रवाई की जाएगी। - संजीव कुमार मौर्य, नगर आयुक्त