हजरत शेख अब्दुल कादिर बगदादी गौस-ए-पाक की याद में ग्यारहवीं शरीफ का जश्न पूरे शहर में अकीदत एहतेराम के साथ मनाया गया। हर तरफ ‘या गौस’ की सदाएं गूंज रहीं थीं। इसी कड़ी में पुराना शहर में जुलूस-ए-गौसिया शानो शौकत के साथ निकला। जुलूस की सरपरस्ती दरगाह आला हजरत के सज्जादानशीन दरगाह आला हजरत के प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खां और कयादत सज्जादानशीन मौलाना अहसन रजा खां कादरी की रही।
अंजुमन गौसो रजा (टीटीएस) की ओर से आयोजित यह जुलूस सैलानी के रजा चौक से रवाना हुआ। इसमें अंजुमन आशिके रसूल, अंजुमन गुलामाने पंजतन पाक, शाहदाना वली, दावते इस्लामी, अमीने शरीअत, फैजाने नियाजिया, गुलामाने अजहरी, गुलशन-ए-आला हजरत, कश्करे रजा समेत कई नए व पुराने 72 अंजुमनों ने इसमें शिरकत की। रंग बिरंगे लिबास पहने हाथों में तख्ती लिए लोग चल रहे थे। जो गौस पाक की सदाएं बुलंद करते और नातो मनकबत की धुन पर झूमते चल रहे थे।
जुलूस सैय्यद हुमायूं अली को हजरत अहसन मियां ने परचम सौंपा और जुलूस रवाना किया। जुलूस मुन्ना खां नीम, मीरा की पैंठ, जवाहर स्कूल, जगतपुर, कांकरटोला से शाहदाना वली होते हुए सैलानी चौक पहुंचा। जुलूस का जगह- जगह इस्तकबाल हुआ। जुलूस की अजमल नूरी, आसिम तहसीनी, परवेज नूरी, मुस्तफा नूरी, नासिर कुरैशी, वसीम तहसीनी व अन्य का सहयोग रहा। इससे पहले आयोजक हाजी शरीक नूरी के निवास पर खत्म-ए-कादरियत हुई। आजम तहसीनी, नासिर कुरैशी आदि ने गौस पाक की शान में कलाम पेश किए। संचालन मुस्तफा नूरी ने किया। मुफ्ती सलीम नूरी व रिजवान नूरी ने खिराज एक अकीदत पेश करते हुए गौस पाक को पैदाइशी वली बताया। उन्होंने कहा कि अल्लाह ने उनको तमाम वलियों का सरदार बनाकर भेजा।