बरेली। शहर को स्मार्ट सिटी का तमगा मिल गया, लेकिन बदला क्या? आज भी शहर में जगह-जगह जाम लग रहा है। सड़कों पर गंदगी पसरी है। करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए अर्बन हाट व स्काई वॉक बेमतलब साबित हो रहे हैं। स्कूल-कॉलेजों के बाहर पान मसाला, सिगरेट व अन्य मादक पदार्थ बिक रहे हैं। बालश्रम व भिक्षावृत्ति के मामले में सामने आ रहे हैं। बाल दिवस पर अमर उजाला की ओर से स्कूली बच्चों को अतिथि पत्रकार बनने का मौका दिया गया तो उनकी ओर से ये प्रतिक्रियाएं सामने आईं। सैकड़ों बच्चों में से चुने गए आठ बच्चे एक दिन के लिए अमर उजाला की संपादकीय टीम का हिस्सा बने। उन्होंने शहर में घूमकर समस्याओं की पड़ताल की और खबरें लिखीं। अव्यवस्थाओं को उजागर कर जिम्मेदारों को आईना दिखाया। अमर उजाला कार्यालय में उनको उपहार देकर प्रोत्साहित किया गया।
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खेल के मैदान पर जला रहे कचरा, शराब की बोतलें भी मिलीं
बरेली कॉलेज के फुटबॉल मैदान पर एक तरफ कचरे का ढेर लगा मिला। उसमें पॉलिथीन, पान मसाले के पॉउच, शराब की बोतलें भी पड़ी थीं। शिक्षण संस्थान में इस तरह की गंदगी से विद्यार्थियों में गलत संदेश जाएगा। वहां मौजूद शिक्षकों व छात्र-छात्राओं ने बताया कि कचरा जलने से सांस लेने में दिक्कत होती है। कक्षाओं तक धुएं का गुबार पहुंचता है। कई बार मना किया, लेकिन कचरे को जलाना बंद नहीं किया गया है। कॉलेज गेट पर ही तमाम दुकानें लगी हैं, जहां कई युवा धूम्रपान कर रहे थे। जबकि, कॉलेज या स्कूल के बाहर इस तरह की दुकानों के संचालन की अनुमति नहीं होती है। इस पर कार्रवाई की जरूरत है। - हिमांशु राठौर, कक्षा नौ, राजकीय इंटर कॉलेज।
दुर्गंध के कारण रास्ते से गुजरना हुआ दूभर
श्यामगंज पुल के नीचे डंपिंग ग्राउंड बना है। वहां से रोज हजारों लोग गुजरते हैं। उचित प्रबंधन नहीं होने से कचरा सड़क तक बिखरा रहता है। दुर्गंध के कारण लोगों को खासी दिक्कतें होती हैं। बरसात में यहां की हालत और भी खराब हो जाती है। यह स्मार्ट सिटी की सूरत को बिगाड़ रहा है। बाहर से आने वाले लोगों के जेहन में शहर की नकारात्मक छवि उभरती है। गंदगी के इस अंबार से कई तरह की बीमारियों के फैलने की आशंका रहती है। इसी कचरे के ढेर के पास खाद्य पदार्थ भी बेचे जा रहे हैं। इनका सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है। जिम्मेदारों को इसका समाधान तलाशना चाहिए। इसका इस्तेमाल बायोगैस बनाने में किया जा सकता है। - आशीष राठौर, कक्षा नौ, तिलक इंटर कॉलेज।
अर्बन हाट के शुरू होने का इंतजार
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत अर्बन हाट बनाया गया। इसमें शहर की पहचान जरी के साथ ही, दूसरे हस्तशिल्प उत्पादों को प्रदर्शित किया जाना था। इसका संचालन होता तो शहरवासियों को घूमने और मनोरंजन के लिए जगह मिलती। बनने के बाद भी भवन पर ताला पड़ा है। कई बार इसको उपयोगी बनाने के लिए कागजी घोड़े दौड़ाए गए, लेकिन कामयाबी नहीं मिल सकी। यहां बनाए गए फूड कोर्ट, कला केंद्र, इंटरप्रिटेशन सेंटर, प्रदर्शनी गैलरी आदि की सुविधा भी शुरू नहीं हो सकी। यहां बच्चों के लिए झूले भी लगाए गए हैं। बच्चों को इसके शुरू होने का इंतजार है। - जैनब फातिमा, कक्षा-आठ, मौलाना आजाद इंटर कॉलेज।
यातायात नियमों की अनदेखी से लग रहा जाम
अपराह्न दो बजे श्यामगंज चौराहे पर जाम लगा था। यहां रॉन्ग साइड से आने वाले वाहन बैरिकेडिंग के बावजूद खाली जगह से निकल रहे थे। वहां मौजूद कांस्टेबल भी इसकी अनदेखी कर रहे थे। ऑटो, ई-रिक्शा व अन्य सवारी वाहनों के बेतरतीब खड़े होने से यहां आएदिन जाम लगता है। पास में बने डलाबघर में दिन में ही जेसीबी और ट्रक से कूड़ा उठाया जा रहा था। इससे भी वहां जाम लग रहा था। यही हाल बाकी शहर का भी है। यातायात नियमों की अनदेखी की वजह से जाम लगता है। दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट और चार पहिया वाहन चलाते समय सीट बेल्ट जरूर लगाना चाहिए। - महक फातिमा, कक्षा-आठ, मौलाना आजाद इंटर कॉलेज।
भिक्षावृत्ति पर लगाम लगाए सरकार
बरेली जंक्शन पर कई बच्चे भीख मांगते नजर आते हैं। अतिथि बाल पत्रकारों ने वहां पहुंचकर इसकी पड़ताल की तो उनमें से कई बच्चे स्वचालित सीढि़यों के पास नशा करते दिखे। शहर के प्रमुख चौराहों पर भी बच्चे भीख मांगते नजर आते हैं। इन बच्चों की तरफ जिम्मेदारों को ध्यान देना चाहिए। कुछ बच्चे यात्रियों की ओर से फेंकी गईं बोतलों में पानी भरकर दोबारा बेचते हैं। इससे लोग बीमार पड़ सकते हैं। सरकार ऐसी पॉलिसी बनाए, जिससे ये बच्चे भिक्षावृत्ति के बजाय पढ़ाई करें। - उजमा फातिमा, कक्षा- आठ, कैंब्रिज स्कूल।
गांधी उद्यान में अव्यवस्थाओं का अंबार
गांधी उद्यान पहुंचे बच्चों का सामना ऊंची झाड़ियों और जलभराव से हुआ। फव्वारे कई माह से बंद पड़े हैं। जलतरंग में पानी की जगह कचरा पड़ा रहता है। परिसर में कहीं भी पीने के लिए पानी की व्यवस्था नहीं है। शौचालयों पर ताले लटक रहे हैं। बाल दिवस के अवसर पर शहर के विभिन्न स्कूलों की ओर से विद्यार्थियों को घुमाने के लिए गांधी उद्यान ले जाया गया। गेट से अंदर घुसने के बाद अव्यवस्थाओं से सामना हुआ तो बच्चों का उत्साह ठंडा पड़ गया। वे मायूस हो गए। - आयुष ग्वाल, कक्षा आठ, कैंब्रिज स्कूल।
ऐसा तो नहीं होता स्काई वॉक
योजनाएं बनाने से पहले संचालन पर भी मंथन हो। योजना बनाने से पहले शहर के जागरूक लोगों की राय ली जाए। इसके लिए ऑनलाइन प्लेटफार्म का इस्तेमाल कर सकते हैं। जिनके लिए आप योजना बना रहे हैं, अगर उनकी भागीदारी सुनिश्चित नहीं करा पाते हैं तो योजना का हाल स्काई वाॅक की तरह होगा। इस पर 11 करोड़ खर्च हो गए, लेकिन इसका संचालन अभी तक नहीं हो सका। अगर परियोजना की उपयोगिता और संचालन पर पहले से मंथन हुआ होता तो यह हाल नहीं होता। अगर यह पारदर्शी होता तो शहर को नई पहचान देता। - शुभ पटेल, कक्षा आठ, क्रिएथिक्स पब्लिक स्कूल।
स्टेडियम में हर कदम पर बदइंतजामी
स्पोर्ट्स स्टेडियम में 4.136 लाख से निर्मित शौचालय इस्तेमाल के लायक नहीं हैं। उसमें सीमेंट की बोरियां रखी हैं। रोशनी की भी कोई व्यवस्था नहीं है। लाखों रुपये की बॉक्सिंग रिंग खुले में सड़ रही है। इस खेल का कोई कोच भी नहीं है। एमसीबी बॉक्स खुला होने से करंट लगने का खतरा रहता है। पवेलियन का प्लास्टर जगह-जगह से टूट रहा है। वहां गंदगी भी पसरी हुई है। दूसरी ओर बने शौचालय पर कहीं भी महिला या पुरुष नहीं लिखा है। उसका गेट टूटा हुआ है। इस कारण महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्टेडियम में कई जगह बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं। - देवांश गोस्वामी, कक्षा नौ, राजकीय इंटर कॉलेज। संवाद