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Bareilly News: थाने से अदालत तक रफ्तार भर रही दहेज की बुलेट

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बरेली। दहेज की बुलेट बाइक थानों से अदालत तक रफ्तार भर रही है। दहेज उत्पीड़न से संबंधित ज्यादातर शिकायतों में इसका जिक्र हो रहा है। अदालतों में ऐसे मुकदमों का अंबार लग चुका है, जिनमें पति या दूल्हे की ओर से दहेज में बुलेट बाइक की मांग की गई है। यह मात्र संयोग है या कानून के मैदान में कोई नया प्रयोग, इसे लेकर लोगों के जेहन में सवाल उठने लगे हैं। क्या वाकई दूल्हे दहेज के दम पर बुलेट राजा बनना चाहते हैं या कानून के मैदान में फर्जी मामले गढ़ने के लिए रटी-रटाई कहानी का इस्तेमाल किया जा रहा है? पेश है कुछ खास मामलों की रिपोर्ट...। ब्यूरो
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बुलेट की जगह दी एक्टिवा तो तेजाब डालने की कोशिश
केस - 1
किला जखीरा निवासी महिला ने एसएसपी से शिकायत कर बताया कि उसकी शादी में मायके वालों ने एक्टिवा स्कूटी दी थी। शादी के बाद पति और ससुराल वाले बुलेट बाइक मांगने लगे। मना करने पर कमरे में बंद कर तेजाब डालने की कोशिश की। एसएसपी के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज की गई।
बुलेट नहीं मिली तो पत्नी का गला घोटने की कोशिश
केस - 2
किला क्षेत्र के कटघर की महिला ने तहरीर देकर बताया कि उसका निकाह फैजान से हुआ था। शादी में परिजनों ने अपाचे बाइक दी थी। फैजान बुलेट बाइक की मांग को लेकर उसकी पिटाई करता था। 21 जनवरी को उसे पीटा और गला घोटने की कोशिश की। तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया था।
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बुलेट नहीं मिली तो पत्नी को घर से निकाला
केस - 3
प्रेमनगर के चाहबाई निवासी महिला ने पुलिस को तहरीर देकर बताया कि उसका निकाह फरीदापुर निवासी मोबीन से हुआ था। निकाह के बाद मोबीन बुलेट की मांग करता था। मांग पूरी नहीं हुई तो पिटाई कर उसे घर से निकाल दिया। महिला ने प्रेमनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
बुलेट की मांग पर लड़के वालों ने तोड़ा रिश्ता
केस - 4
आंवला निवाली रामदेई ने रिपोर्ट कराई कि उन्होंने बेटी की सगाई अलीगंज के खैलम निवासी युवक से की थी। एक मार्च को शादी होनी थी। लड़की वालों ने इसकी तैयारी पूरी कर ली, लेकिन लड़के ने अचानक बुलेट की मांग रख दी। असमर्थता जताने पर लड़के ने रिश्ता तोड़ दिया।

ज्यादातर मामलों में दोहराई जा रही रटी-रटाई कहानी
दहेज प्रतिषेध अधिनियम के मामलों पर गौर करें तो ज्यादातर में बुलेट बाइक, कार और नकदी वाली रटी-रटाई कहानी दोहराई जा रही है। देवर, जेठ, ननदोई और ससुर पर छेड़खानी का आरोप भी लगाया जाता है। इनमें से तमाम मामले जांच में झूठे साबित होते हैं। ऐसे में जिन महिलाओं के साथ सच में ज्यादती होती है, उनकी कहानी को भी शक की निगाह से देखा जाता है। बार-बार कहानी दोहराए जाने से पुलिस भी दहेज उत्पीड़न के मामलों को हल्के में लेती है। ऐसे ज्यादातर मामलों में जमानत भी आसानी से मिल जाती है।

दहेज उत्पीड़न संबंधी ज्यादातर मामलों में एक खास कंपनी की बाइक का नाम होता है। ये मामले जांच में कहीं नहीं टिकते। कई बार तो दंपती के बीच आपसी मनमुटाव या सास-ससुर से कोई समस्या होने पर ऐसे मामले दर्ज करा दिए जाते हैं। साक्ष्यों के आधार पर मामलों में चार्जशीट या एफआर लगाई जाती है। - मानुष पारीक, एसपी सिटी
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