बरेली। राजस्व न्यायालयों में वाद निपटारे में हो रही देरी का एक नमूना देखिए। वर्ष 2018 में हुए सहकारी समितियों के चुनाव के खिलाफ डीएम कोर्ट में वर्ष 2020 में वाद दायर हुए। इसका फैसला 25 जून को आया है। जबकि, दो साल पहले वर्ष 2023 में ही समितियों के दोबारा चुनाव हो गए। ऐसे में वादकारियों के मामले आधारहीन हो गए।
डीएम कोर्ट से पारित आदेश के मुताबिक, मीरगंज के परौरा गांव निवासी मनोहर सिंह ने वर्ष 2018 में 30 जनवरी व 17 फरवरी को मुगलपुर सहकारी संघ के चुनाव के विरुद्ध डीएम कोर्ट में मध्यस्थ वाद दाखिल किया था। कोर्ट की मांग पर जिला सहायक सहकारी निर्वाचन अधिकारी ने 26 सितंबर 2023 को पत्र भेजकर बताया कि पांच साल बाद दोबारा मुगलपुर सहकारी संघ के संचालक मंडल का चुनाव 29 मार्च 2023 को हो गया है। सभापति, उप सभापति और अन्य समितियों को भेजे जाने वाले प्रतिनिधियों का चुनाव भी 31 मार्च 2023 को चुका है। मीरगंज सहकारी संघ के सभापति हुरहुरी के अजयवीर सिंह और महेंद्र पाल उप सभापति निर्वाचित हुए हैं। नई कार्यकारिणी गठित होने के बाद वादी मनोहर सिंह का वाद आधारहीन और क्षेत्राधिकार विहीन हो गया है
न्याय मिलने से पहले बीत गया मौका
मीरगंज के तिलमास गांव निवासी प्रेम सिंह ने भी 30 जनवरी 2018 में तिलमास साधन सहकारी समिति के चुनाव के विरुद्ध डीएम कोर्ट में 22 जून 2020 को वाद दाखिल किया था। इसी तरह बहेड़ी तहसील क्षेत्र के गांव टांडा मीरनगर के जितेंद्र सिंह ने सहकारी संघ गिरधरपुर में 17 फरवरी 2018 को हुए चुनाव और मीरगंज के नरखेड़ा निवासी छत्रपाल सिंह ने सहकारी संघ मुगलपुर में नियम विरुद्ध चुनाव होने का आरोप लगाकर 28 जुलाई 2020 को डीएम कोर्ट में वाद दाखिल किया था। उन्होंने सहकारी संघ प्रभारी राकेश तिवारी पर लापरवाही एवं किसानों के हित के विपरीत कार्य करने का आरोप भी लगाया था। ये सभी वाद डीएम कोर्ट ने यह कहकर समाप्त कर दिए हैं कि दोबारा चुनाव होने और नई कार्यकारिणी गठित होने से वाद वे आधारहीन हो गए हैं। संवाद