क्लीनिक को सीज करती स्वास्थ्य विभाग की टीम
मीरगंज। झोलाछाप के इलाज से युवती की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने अवैध क्लीनिक को सील कर दिया है।
17 मई को युवती अपने सहेली के साथ बाजार आई थी। जूस पीने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। यहां झोलाछाप के क्लीनिक पर युवती का गलत इलाज होने से उसकी मौत हो गई। मामला संज्ञान में आने के बाद रविवार को झोलाछाप अकील के क्लीनिक पर स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची और छापा मारकर क्लीनिक को सील कर दिया। इस क्लीनिक में मरीज भर्ती पाए गए थे, जबकि यहां न तो किसी तरह का पंजीकरण था और न ही संचालन की कोई अनुमति। यह कार्रवाई चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विनय कुमार पाल के निर्देशन में की गई।
स्वास्थ्य विभाग की टीम में डॉ. रोहन दिवाकर, फार्मासिस्ट हेमलता और अजय कुमार शामिल रहे। डॉ. विनय कुमार पाल ने बताया कि हमारी प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। अवैध क्लीनिक और झोलाछापों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। यह सिर्फ शुरुआत है।
एक क्लीनिक सील, दर्जनों अब भी चालू
हालांकि इस कार्रवाई से यह सवाल भी उठने लगे हैं कि सिर्फ एक क्लीनिक सील कर देने से क्या मीरगंज के दर्जनों अवैध क्लीनिकों पर रोक लग जाएगी? क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार है, जो न तो योग्य हैं, न ही उनके पास मरीजों का उपचार करने की कानूनी अनुमति। फिर भी वे खुलेआम क्लीनिक चला रहे हैं और लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन फर्जी क्लीनिकों पर सालों से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। कुछ के पीछे स्थानीय रसूखदारों का संरक्षण भी बताया जा रहा है, जिससे स्वास्थ्य विभाग भी दबाव में नजर आता है। संवाद