बरेली। नगर निगम के तमाम दावों के विपरीत शहर की कूड़ा उठान की व्यवस्था धड़ाम हो चुकी है। पाॅश इलाकों से लेकर कई मोहल्लों में कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां हफ्ते में सिर्फ दो-तीन दिन ही आ रही हैं। इस अव्यवस्था की सबसे बड़ी वजह डोर-टू-डोर व्यवस्था में लगे ठेका (प्राइवेट) कर्मचारियों का कई महीनों से रुका हुआ भुगतान है। मानदेय नहीं मिलने से नाराज कर्मचारी कूड़ा उठाना बंद कर ठेकेदारों के साथ नाला सफाई के काम में जुट गए हैं।
ठेका कर्मचारियों के मुंह मोड़ने के कारण शहर में कई जगह गंदगी के ढेर लगे हैं। सफाई कर्मचारी संघ के अध्यक्ष आशीष कुमार ने बताया कि कई महीनों से भुगतान न होने के कारण कर्मचारी काम पर नहीं लौट रहे हैं। इससे आम जनता को परेशानी झेलनी पड़ रही है। जनप्रतिनिधियों ने भी नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। बानखाना के पार्षद शमीम खान का कहना है कि डोर-टू-डोर कूड़ा उठान की व्यवस्था चरमरा गई है। पार्षद राजेश अग्रवाल ने कहा कि कर्मचारियों की मनमानी बढ़ती जा रही है और नगर निगम के अधिकारी इस पर लगाम लगाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। इस प्रशासनिक ढिलाई और वेतन विवाद का खामियाजा शहर की जनता को भुगतना पड़ रहा है।