बरेली। रामलीला के मंच पर प्रभु श्रीराम के वनगमन के दौरान सीता और उर्मिला की भावुक विदाई का दृश्य श्रद्धालुओं को बहनों के आपसी प्रेम से परिचित कराता है। सुभाषनगर की रामलीला में सगी बहनें वृंदा और तेजस्विनी बाजपेयी, सीता-उर्मिला के किरदार को साकार कर रही हैं। मंचन के दौरान उनका आपसी प्रेम, जुड़ाव और एक-दूसरे के प्रति सम्मान साफ झलकता है, जो रामलीला की प्रस्तुति को और सजीव बनाता है।
सीता की भूमिका निभाने वाली वृंदा बताती हैं कि सीता का समर्पण उन्हें हमेशा प्रेरणा देता है। इस किरदार को निभाने से बहन के साथ उनका रिश्ता और मजबूत हुआ है। वहीं, उर्मिला का किरदार निभा रहीं तेजस्विनी के मुताबिक उर्मिला का धैर्य और त्याग उनके लिए हमेशा प्रेरणादायक रहा है। मंचन दोनों बहनों के संबंध को और भी खास बना रहा है।
व्यक्तिगत जीवन में अलग-अलग पेशों से जुड़े हैं किरदार
राम का किरदार निभा रहे सिद्धांत बीकॉम के विद्यार्थी हैं। उन्हें अभिनय का शौक है। वह बताते हैं कि बचपन में अभिभावकों के साथ रामलीला देखने जाते थे। वहीं से उनकी रुचि बढ़ी। तभी से ही वह रामलीला में किरदार निभाते आ रहे हैं। लक्ष्मण का किरदार निभा रहे यश ठाकुर गुरुग्राम में एक निजी कंपनी में अकाउंट एग्जीक्यूटिव हैं। थिएटर के साथ ही उनका रुझान तबला वादन में भी है।
दिन में नौकरी, रात में रिहर्सल
हनुमान का किरदार निभाने वाले नितिन निजी कंपनी में सेल्स मैनेजर हैं। वह बताते हैं कि मंचन के दौरान वह जल्दी घर आ जाते हैं और सभी कलाकरों के साथ मिलकर रिहर्सल करते हैं। 12 वर्षों से वह रामलीला का हिस्सा हैं और अब लोग उन्हें बजरंगी के नाम से भी बुलाते हैं। रामलीला में बाल हनुमान का अभिनय उनके बेटे अंश जौहरी करते हैं।
मंचन से मिली नई पहचान
दीपक सिंह बताते हैं कि वह 24 वर्षों से रावण का किरदार निभा रहे हैं। वह एक कंपनी में सुपरवाइजर पद पर तैनात हैं। रामलीला के लिए हर बार डेढ़ माह का अवकाश लेते हैं। इन छुट्टियों की कंपनी तनख्वाह भी नहीं काटती है। लंबे समय से रावण का किरदार निभाने की वजह से गली-मोहल्ले में सभी उनको लंकेश नाम से पुकारते हैं। संवाद