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बृजेश पाठक की फटकार के बाद बैक फुट पर आए अफसर

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बरेली। अवैध खनन निकासी विवाद में शुरू हुई भाजपा के दो दिग्गज नेताओं की जंग में हाथ डालने की सजा बहेड़ी इंस्पेक्टर धनंजय सिंह को लाइन हाजिर होकर भुगतनी पड़ी। जिला योजना की बैठक में प्रभारी मंत्री बृजेश पाठक की पटकार के बाद प्रशासन और पुलिस के अफसरों ने पानी सिर से ऊपर होता देख इंस्पेक्टर को लाइन हाजिर करना ही ठीक समझा क्योंकि मामला सीएम तक पहुंचने के बाद अफसरों को बड़ी कार्रवाई का डर था।
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बहेड़ी में लंबे समय से चल रहे अवैध खनन से होने वाली मोटी कमाई को लेकर भाजपा के दो दिग्गजों के बीच चल रही राजनीतिक प्रतिस्पर्धा नौकरशाही को भारी पड़ गई। इंस्पेक्टर ने विधायक समर्थक भाजपा नेता मोहन सिंह समेत पांच पर नामजद और 15 अज्ञात पर रंगादारी मांगने समेत विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर दी थी। इंस्पेक्टर ने यह काम खनन पट्टेदार की तहरीर पर किया गया। बताया जाता है कि एफआईआर दर्ज कराने में बदायूं के एक बड़े भाजपा नेता की भूमिका थी। जिला योजना की बैठक लेने के लिए जब प्रदेश के विधि न्याय एवं बरेली के प्रभारी मंत्री बृजेश पाठक बरेली आए तो एक पीड़ित विधायक ने सबसे पहले उनसे सर्किट हाउस में बहेड़ी इंस्पेक्टर के न हटने का रोना रोया। फिर बाकी विधायकों से भी कहा कि वह इंस्पेक्टर को हटवाने में उनका साथ दें। बीते डेढ़ साल से अफसरशाही से हर स्तर पर मात खाए विधायकों ने इंस्पेक्टर को हटाने के मुद्दे पर प्रभारी मंत्री बृजेश पाठक से जिला योजना योजना की बैठक में सार्वजनिक रूप से शिकायत की। उस समय वहां कमिश्नर, डीएम, एसएसपी, सीडीओ समेत सभी छोटे बड़े अफसर मौजूद थे। बृजेश पाठक ने अफसरों को स्पष्ट रूप से कह दिया कि कोई भी काम करें तो उसमें सांसद-विधायकों की राय लें। लाभार्थियों की सूची भी भेजें। दो बड़े अफसरों ने प्रभारी मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि 20 भाजपा नेताओं पर एफआईआर दर्ज हो गई तो बहेड़ी इंस्पेक्टर को क्यों नहीं हटाया। इंस्पेक्टर को तुरंत हटाओ। बृजेश पाठक की नाराजगी को भांपते हुए अफसरों ने बैठक के बाद ही इंस्पेक्टर को हटाने का ताना-बाना बुन लिया। दो दिन के अंदर ही इंस्पेक्टर को लाइन में बुला लिया गया।
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