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पेट्रोल-डीजल में भी धुला करोड़ों का कालाधन

Sat, 03 Dec 2016 01:24 AM IST
बरेली, ब्यूरो
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हजार और पांच सौ के नोटबंदी के बाद पेट्रोल पंपों पर मिली सुविधा की आड़ में खेल हो गया।  डीजल पेट्रोल गिरी बिक्री नवंबर में सितंबर माह के मुकाबले 30-34 प्रतिशत तक अचानक बढ़ गयी। पेट्रोलियम कंपनियां आंकड़े भले कुछ दर्शा रही हों लेकिन बताया जाता है कि प्रभावशाली पंप मालिकों ने इसकी आढ़ में खेल कर दिया। कंपनी अफसर और ट्रांसपोर्टर भी इस मामले में पीछे नहीं रहे। 
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केंद्र सरकार ने 9 नवंबर से दो दिसंबर तक प्रतिबंधित करेंसी से डीजल पेट्रोल खरीदने की छूट दी थी। इस दौरान सभी पंपों पर बिक्री बढ़ गयी। पेट्रो कंपनियों के आंकड़े बताते हैं कि बीते वर्ष नवंबर माह में बरेली में पेट्रोल 5437000 लीटर बेचा गया था। नोटबंदी के बाद इस बार नवंबर माह में पेट्रोल की बिक्री 6488000 लीटर हुई है। यानी पिछले साल के मुकाबले 19.33 की ग्रोथ हुई। इसी तरह डीजल की बिक्री पिछले साल नवंबर में 13053000 लीटर हुई थी। इस बार नवंबर में 16899000 लीटर बेचा गया जो पिछले साल के मुकाबले 29.46 फीसदी अधिक है। अमूमन नवंबर में डीजल खपत कम होती है। इसके बावजूद डीजल बीते वर्ष से ज्यादा बिका है। जाहिर है कि पुराने नोटों के बदले तेल खरीदने की आपाधापी ने भी कंपनियों की कमाई बढ़ा दी है। हालांकि इस ग्रोथ के पीछे कई संशय बने हुए हैं। माना जा रहा है कि इसकी आड़ में कालाधन भी खूब सफेद हुआ है। आरटीआई एक्टिविस्ट खालिद जिलानी इसी अंदेशे को लेकर आईओसी  से खरीद बिक्री के बारे में जन सूचना अधिकार के तहत जानकारी मांगी है। 

काला धन हो गया सफेद 
जिले में 163 पंप हैं। ज्यादातर पंपों के मालिक प्रभावशाली और राजनीति के लोग हैं। ट्रांसपोर्टर भी पंप संचालक हैं। नोटबंदी होते ही तमाम ग्रामीण और प्रमुख पंपों पर कालाधन सफेद करने का धंधा शुरू हो गया। बताया जाता है कि पंपों पर वास्तविक सेल और बैंकों में जमा हुई राशि में भारी अंतर है। इस धंधे में कुछ कंपनी अफसर भी शामिल बताए जाते हैं। पिछले 24 दिनों में पचास करोड़ रुपये से ज्यादा करेंसी बदली गयी है। शहर से ज्यादा गांवों के पेट्रोल पंपों पर खूब खेल हुआ है। 
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मंत्रालय ने मांगी जानकारी
पंपों पर बड़े पैमाने पर नोट बदलने की जानकारी मिलने पर पहली दिसंबर दोपहर में आदेश आया कि यह सुविधा दो दिसंबर तक सीमित कर दी गई। एक और दो दिसंबर में डीजल पेट्रोल की सेल ज्यादा दर्ज हुई है। पेट्रो कंपनियों ने सभी कार्यालयों से सेल ब्योरा तलब किया है। 
 
एडवांस में भी ले लिया डीजल
तमाम बड़े संस्थानों में डीजल की खपत ज्यादा है। जनरेटर और गाड़ियों में साल में कई हजार लीटर की खपत होती है। जानकारी यह भी मिली है कि पेट्रोल पंपों ने पुराने नोटों से एडवांस रुपया जमा कराकर डीजल स्टोर किया है। 

इंफो:

नवंबर माह में तुलनात्मक 
बिक्री (करोड़ /रुपये)

         इस वर्ष     पिछले वर्ष          
डीजल    93         78
पेट्रोल     45.5      37
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जिले में पंप 
आईओसी     89
बीपीसी       33
एचपीसी      41
कुल         163

वर्जन:
पेट्रोल पंपों पर वास्तविक बिक्री के अनुपात में ही बैंकों में धनराशि जमा होती है। इसकी जानकारी कंपनियों को भी होती है लेकिन यह कहना अनुचित होगा कि पंपों से नोट बदली हुई है- अनिल अग्रवाल, अध्यक्ष पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन 
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