सेंथल। हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन और शोहदा-ए-कर्बला की शहादत की याद में कस्बे में दो माह आठ दिन से चल रही अजादारी का समापन शनिवार को हुआ। अजादारी के आखिरी दिन अजादारों ने शहीदों को याद कर आंसू बहाए। इस दौरान कस्बे में जुलूस-ए-अलम उठे, जिसमें अंजुमन शामिल हुए। जंजीर का मातम हुआ और शबीहे ताबूत की जियारत कराई गई।
शहीदाने कर्बला हजरत इमाम हुसैन और शोहदा-ए-कर्बला की याद में अजादारी के आखरी दिन दो जुलूस-ए-अलम उठे। अमारी का जुलूस इमामबाड़ा जुल्फिकार हसनैन से अंजुमन पंजेतनी के नेतृत्व में उठा। इससे पहले हुई मजलिस को मौलाना फराज वास्ती ने खिताब किया। जुलूस तय मार्ग से होता हुआ इमामबाड़ा कला पहुंचा। वहां कर्बला में शहीद हुए 72 शोहदा-ए-कर्बला के शबीहे ताबूत की जियारत कराई गई। इसमें अंजुमन आजाए हुसैनी, अंजुमन जुल्फिकारे हैदरी, अंजुमन नादेअली और अंजुमन हैदरी ने नौहाख्वानी व सीनाजनी की। आखिर में अंजुमन पंजेतनी ने अलविदाई नौहा पड़ा।
वहीं, ताजिये का दूसरा जुलूस मोहल्ला चौधरी से उठा। मजलिस को मौलाना रियाज अस्करी ने खिताब कर शहीदाने कर्बला के मसाएब बयान किए। इसमें हजरत इमाम हसन अस्करी के शबीहे ताबूत की जियारत कराई गई। मोहल्ला चौधरी चौक पर अंजुमन हुसैनिया ने जंजीर का मातम किया। जुलूस निर्धारित मार्ग से होता हुआ इमामबाड़ा खुर्द पर अलविदा या हुसैन की सदाओं के साथ समाप्त हो गया। इस दौरान अंजुमन असगरिया, अंजुमन यादगारे हुसैनी, अंजुमन हुसैनिया ने नौहा पढ़ा। इमामबाड़ा दरबारे हुसैन और इमामबाड़ा गुलशन अली में ख्यामे हुसैनी सजा कर कर्बला का मंजर पेश किया गया। मोहल्ला हाकिम टोला के इमामबाड़ा खुर्द में निशान कमेटी की ओर से एक दिवसीय मजलिसे अजा का आयोजन किया गया। इसमें देश के विख्यात उलमाओं ने भाग लिया। मजलिस के बाद अंजुमन असगरिया ने नौहा पड़ा और इमाम हसन अस्करी के शबीहे ताबूत की जियारत कराई गई।