शुक्रिया! महादानियाें के दान से बच गई जानें
गर्भवती, कैदी और नारी निकेतन की महिलाआें को मिला अमर उजाला शिविर में जुटा खून
केस एक- बरेली में सिपाही पद पर तैनात इटावा के रामवीर यादव (55) को जिला अस्पताल गंभीर अवस्था में लाया गया। 2.6 हीमोग्लोबिन खून था। रात में ही एक यूनिट खून चढ़ा। भर्ती के दौरान 4 यूनिट रक्त चढ़ाया गया। जब परिवार के सदस्य आए तो एक डोनर देकर एक यूनिट और रक्त चढ़ाया गया। रामवीर स्वस्थ हैं।
केस दो- रविवार को जिला महिला अस्पताल में बेहद गंभीर हालत में एनीमिया से पीड़ित अनीता भर्ती हुई। गर्भवती अनीता (30) की हालत इतनी खराब थी कि अनीता के साथ परिवार में कोई खून देने वाला नहीं था। रात में डॉ. नीलम आर्या को फोन करना पड़ा। तुरंत बिना पैसे और डोनर के खून दिया गया। अनीता की जान बच गई।
एक माह पहले की बात है। विश्व रक्तदाता दिवस पर अमर उजाला परिसर में जिला अस्पताल के सहयोग से रक्तदान शिविर लगा था। 14 जून को भीषण गर्मी थी, लेकिन रक्तदानियाें का हौसला नहीं डिगा। सौ यूनिट रक्त जमा हुआ। परिणाम एक माह बाद ऐसे आए हैं कि आप भी जानकर खुश होंगे। ऐसे- ऐसे जरूरतमंदाें की जान बचाई गई है जिनको खून की अचानक जरूरत पड़ी। इनसे न डोनर मांगा गया और न ही पैसा। परिवार वालों की दुआएं मन से निकली हैं। ब्लड बैंक के स्टॉफ का कहना है कि किसी भी जरूरतमंद को वापस नहीं लौटना पड़ा।
ब्लड बैंक ने एक माह में 50 गर्भवती महिलाआें को रक्त दिया। 22 महिलाएं ऐसी थी जिनके पास कोई डोनर नहीं था। उनको फ्री में रक्त मिला। 5 कैदी, तीन नारी निकेतन और तीन ममता मंदित आश्रम की संवासिनियाें की भी जान इसी से बचाई गई। ब्लड बैंक में इस समय 93 यूनिट रक्त है।
निगेटिव खून की अभी भी है कमी
ब्लड बैंक में ओ निगेटिव, ए निगेटिव खून नहीं है। एबी निगेटिव और बी निगेटिव रक्त है।
सभी रक्तदानी रहे स्वस्थ
ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. यूवी सिंह ने बताया कि अमर उजाला कैंप में जितने भी रक्तदान करने आए सभी स्वस्थ हैं। खून की जांच में किसी को भी एचआईवी, मलेरिया, हेपेटाइटिस बी व सी और वीडीआरएल बीमारी नहीं हैं। सभी पूरी तरह स्वस्थ्य हैं। वे जब चाहे तब खून दे सकते हैं। यह जांच करीब चार हजार की होती हैं जो रक्तदान में फ्री मिलती हैं।