बरेली। कोरोना के बढ़ते मामलों को लेकर कमिश्नर ने शनिवार को अफसरों के साथ मंथन किया। कहा, यह सुनिश्चित किया जाए कि 24 घंटे में ही कोरोना की जांच रिपोर्ट मिल जाए। कोविड-19 के उन मरीजों को, जिनका गंभीर अवस्था में आईसीयू में इलाज चल रहा है, उन्हें मोबाइल फोन का प्रयोग न दिया जाए। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों की कोरोना जांच के लिए कैंप लगाए जाएं।
कमिश्नर रणवीर प्रसाद शनिवार को आयुक्त सभागार में कोविड-19 की रोकथाम के उपायों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने आईवीआरआई के संयुक्त निदेशक डॉ. वीके गुप्ता से कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सैंपल मिलने के 24 घंटे के भीतर जांच रिपोर्ट अवश्य आ जाए। इसके लिए यदि आवश्यक्ता पड़े तो लैब में दो शिफ्टों में काम कराया जाए। डीआईजी राजेश कुमार पांडेय, डीएम नितीश कुमार, एसएसपी शैलेश कुमार पांडेय, सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ल आदि अधिकारियों से कई बिंदुओं पर चर्चा करते हुए कमिश्नर ने कहा कोरोना मरीजों के लिए ऑक्सीजन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। डीएम ने कहा कि पूल सैंपलिंग के लिए और अधिक समूह बनाए जाएं।
स्पाइनल इंजरी केंद्र बनेगा सैंपल कलेक्शन सेंटर
- मंडलायुक्त ने कहा कि कोरोना की जांच के लिए पीलीभीत रोड स्थित स्पाइनल कार्ड इंजरी केंद्र को अस्थायी रूप से सैंपल कलेक्शन सेंटर बना दिया जाए।
ठेले और खोमचे वालों की भी हो पूल टेस्टिंग
- बैठक में डीआईजी राजेश पांडेय ने कहा कि जिन बाजारों में अधिक भीड़ भाड़ रहती है और जिन दुकानदारों के यहां ज्यादा ग्राहक आते हैं, उनकी जांच प्राथमिकता के आधार पर कराई जाए। साथ ही हाथ ठेला और खोमचे वाले या वे लोग जो दूसरों के अधिक संपर्क में आते हैं, उनकी पूल सैंपलिंग कराई जाए।
सोमवार, मंगलवार को होगी पुलिस कर्मियों की जांच
- डीआईजी ने कहा कि सोमवार और मंगलवार को पुलिस लाइन में कैंप लगाकर बुखार-खांसी से पीड़ित पुलिस कर्मियों की कोरोना जांच कराई जाए। मंडलायुक्त ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से कहा कि बिना मॉस्क पहने लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए लगातार अभियान चलाया जाए।