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छह माह तक बढ़ा कैंट बोर्ड का कार्यकाल

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बरेली। कैंट बोर्ड के चुनाव छह माह के लिए टल गए हैं। रक्षामंत्रालय ने मौजूदा बोर्ड का कार्यकाल छह माह के लिए बढ़ा दिया है। इस बाबत आदेश भी जारी हो गए हैं। दरअसल, कैंट एक्ट 2006 में संशोधन का प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय के पास लंबित है। माना जा रहा है कि इस पर फैसले के बाद ही कैंट बोर्ड के चुनाव होंगे।
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कैंट बोर्ड में मौजूदा निर्वाचित सदस्यों का पांच वर्ष का कार्यकाल 15 फरवरी को खत्म हो रहा है। नए बोर्ड के गठन के लिए चुनाव को लेकर कैंट एक्ट के तहत नई वोटर लिस्ट और वार्डों के आरक्षण का काम भी पूरा हो चुका है, लेकिन अब तक चुनाव की अधिसूचना जारी नहीं हुई थी। ऐसे में मौजूदा बोर्ड का कार्यकाल छह माह बढ़ने से सभासदों को खासी राहत मिल गई है। यह पहली मर्तबा नहीं है, जब कैंट के चुनाव छह माह के लिए टाले गए हैं। इससे पूर्व रक्षा मंत्रालय ने 2003 में कैंट बोर्ड का कार्यकाल दो बार छह-छह माह बढ़ाया था। रक्षा मंत्रालय ने 2004 में 1924 के छावनी अधिनियम में संशोधन करते हुए वर्तमान में प्रभावी अधिनियम 2006 को संशोधनों के बाद 2007 तक बोर्ड को भंग रखा था। इसके बाद 2008 में नए अधिनियम से चुनाव हुए थे। इनका छह वर्ष का कार्यकाल 2008 से 2014 तक छह-छह माह का एक्सटेंशन मिलने के बाद पूरा हुआ था।
उपाध्यक्ष के लिए सीधा चुनाव
कैंट बोर्ड के चुनाव टलने का कारण उपाध्यक्ष पद के लिए सीधे चुनाव होना है। माना जा रहा है कि चुनाव नियमावली में संशोधन के बाद बोर्ड में उपाध्यक्ष की शक्तियां बढ़ाई जा सकती हैं। अब तक उपाध्यक्ष का चुनाव सभासद करते हैं। रक्षा मंत्रालय नेे जनता से एक्ट में संशोधन के प्रस्ताव मांगे थे, इसमें उपाध्यक्ष का चुनाव वार्ड सदस्यों की तरह सीधे जनता से कराने की पुरजोर वकालत की गई थी।
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