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Bareilly News: किरायेदारों, छात्रों और घरेलू कामगारों का होगा सत्यापन

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जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्या के चिह्नांकन के लिए हुई बैठक
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बरेली। मकान मालिक किरायदारों के साथ ही घरेलू नौकरों के बारे में छानबीन करा लें। विश्वविद्यालयों और मदरसों में रहने वाले विदेशी छात्रों की भी जांच की जाए। यदि कोई व्यक्ति पश्चिम बंगाल या बिहार का पता दिखता है तो उसे सत्यापित करना जरूरी है। ये बातें एसएसपी अनुराग आर्य ने बृहस्पतिवार को कलक्ट्रेट सभागार में बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्या के चिह्नांकन के लिए हुई बैठक में कहीं।
एसएसपी ने कहा कि सड़क किनारे झोंपड़ी या टेंट में रहने वालों, निर्माण कार्यों या ईंट भट्ठों पर काम करने वालों, रेलवे स्टेशनों या उसके आसपास रहने वालों और होटलों-धर्मशालाओं में काम करने वालों की गंभीरता से जांच की जानी है। सभी विदेशी नागरिकों का सत्यापन किया जाएगा कि वह किस आधार पर यहां रह रहे हैं। उनके प्रमाणपत्रों की भी पूरी गंभीरता के साथ छानबीन की जाएगी।
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जिलाधिकारी ने नगर आयुक्त को नगर निगम क्षेत्र में मौजूद और काम कर रहे लोगों का चिह्नांकन करने और रोहिंग्या-बांग्लादेशियों की विस्तृत सूची तैयार करने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी ने कहा कि हमें हर उस व्यक्ति की जांच करनी है जो हमारे देश का नागरिक नहीं है।
यदि अवैध अप्रवासी जनपद में पाए जाते है तो उन्हें सत्यापन पूरा होने तक डिटेंशन सेंटर में रखा जाएगा। सत्यापन के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत उन्हें उनके देश भेजा जाएगा। बैठक में नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य के साथ ही पुलिस-प्रशासन के सभी शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे।

डिटेंशन सेंटर के लिए तीन अधिकारी देखेंगे जगह
जिलाधिकारी ने कहा कि यदि अवैध अप्रवासी जनपद में मिलेंगे है तो सत्यापन पूरा होने उन्हें डिटेंशन सेंटर में रखा जाएगा। डिटेंशन सेंटर के लिए जगह तलाशने की जिम्मेदारी एडीएम सिटी, एसपी सिटी और एसपी उत्तरी को सौंपी गई है। तीनों अधिकारियों द्वारा बताई गई जगह पर जिलाधिकारी और एसएसपी अंतिम निर्णय लेंगे। ब्यूरो
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पिछले तीन महीने में जारी निवास प्रमाणपत्र और आधार कार्ड की होगी जांच

बरेली। मंडल के चारों जिलों में घुसपैठियों की पहचान करने के लिए मंडलायुक्त भपूेंद्र एस. चौधरी ने पिछले तीन महीनों में जारी हुए निवास प्रमाणपत्रों और आधार कार्डों को भी जांच के दायरे में लिया है। संदेह है कि एसआईआर अभियान के तहत मतदाता सूची में बने रहने के लिए बड़े स्तर पर फर्जी निवास प्रमाणपत्र और आधार कार्ड बनवाए गए हैं।
कमिश्नर ने बताया कि सामान्य तौर पर लोग गांवों में प्रधान और शहरों में पार्षद या सभासद से अपने निवास के बारे में प्रमाणित करा लेते हैं। इसी के आधार पर वह निवास प्रमाणपत्र और आधार कार्ड पाने में सफल हो जाते हैं। इसलिए देखा जाएगा कि विभिन्न तहसीलों से किस क्षेत्र में अधिक लोगों ने निवास प्रमाणपत्र बनवाए हैं।
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इसी तरह आधार कार्डों के बारे में भी विस्तृत जांच होगी। मंडलायुक्त ने बताया कि इस संबंध में वह डीएम को निर्देश जारी कर रहे हैं। नगरीय निकायों में ठेके पर काम करने वालों के नाम-निवास की जांच भी कराई जाएगी। संवाद
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