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कई मायनों में खास है टेलगो ट्रेन

Fri, 27 May 2016 01:26 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
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टेल्गो ट्रेन का कोच
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स्पेन की हाईस्पीड टेलगो ट्रेन क ई मायनों में खास है। ट्रायल के दौरान भारतीय इंजन से इसे खींचा जाएगा। स्पेन से आए इसके कोच 30 साल पुराने जरूर हैं लेकिन रसही खरखाव के कारण पुराने दिखाई नहीं देते हैं। ट्रैक बेहतर हो तो 250 से लेकर 275 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से इस ट्रेन को दौड़ाया जा सकता है। वहीं दूसरी ओर तजाकिस्तान में भारत से खराब रेल ट्रैक पर यही ट्रेन और कोच 180 से 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रहे है।
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टेलगो कंपनी ने यह कोच बिना किसी शुल्क के भारत में ट्रायल के लिए भेजे हैं। इनके ट्रायल पर खर्च होने वाली राशि भारतीय रेल मंत्रालय खर्च नहीं करेगा। हां इतना जरूर है कि ट्रायल सफल हुआ और भारत सरकार से अनुबंध होने पर इस कंपनी के नए कोच में यहां के लोगों को यात्रा करने का मौका मिलेगा। ट्रायल के दौरान इस्तेमाल कोच को ट्रैक पर नहीं दौड़ाया जाएगा। तीन फेस में टेलगो और भारतीय रेल की आरडीएसओ लखनऊ यूनिट संयुक्त रूप से ट्रायल कराएगी। इस यूनिट के परियोजना प्रबंधक नीरज श्रीवास्तव का कहना है कि हमको ट्रायल की रिपोर्ट भेजनी है। उसके बाद सरकार और रेल मंत्रालय को फैसला करना है कि इस कंपनी के कोच खरीदे जाने हैं या नहीं।
बहुत कुछ है इसमें खास
1- भारतीय कोच में चार व्हील होते हैं लेकिन टेलगो के टिल टिन तकनीक पर आधारित एक कोच में सिर्फ दो व्हील  हैं। जिन पर कोच झूले की तरह लटका होता है। एक से दूसरे डिब्बे को कनेक्ट करने में भारतीय कोच की तुलना में अधिक समय लगता है। भारतीय कोच चार व्हील पर होने के कारण कमानी पर बैलेंस हो जाता है। टेलगो में ऐसा नहीं है, इसके डिब्बे छोटे होने के कारण दो कोच के बीच में हाईपावर एयर स्प्रिंग लगी होती है जो कि मोड़ पर तेज गति में आसानी से मुड़ जाती है लेकिन भारतीय ट्रेन के लिए स्पीड कम करनी होती है।
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2- टेलगो के कोच में पहियों के बीच कमानी और सामान्य शॉकर नहीं होते, बल्कि शॉकर में हाइड्रोलिक पावर के होने के कारण तेज गति में यात्रा के दौरान न झटके लगते हैं और न ही कंपन होती है।
3- बोगी का संचालन सेंसर पर आधारित है। यदि व्हील की बेयरिंग ज्यादा गर्म होगी को बोगी के प्रत्येक कंट्रोल रूम में लगे कंप्यूटर की स्क्रीन पर ट्रेन की स्पीड कम करने के लिए संदेश मिल जाएगा। 
4- ट्रेन को तत्काल रोकने के लिए डिस्क ब्रेक लगे होते हैं। जिसके कारण यात्रियों को झटका महसूस नहीं होता।
बोगी की खासियत
खिड़की बड़े साइज में, वैक्यूम टॉयलेट। चेयर कार में 36, एग्जीक्यूटिव में 27 सीट। एक सीट से दूसरी सीट की दूरी भारतीय ट्रेनों की तुलना में तीन इंच अधिक है। जिसके कारण यात्रियों को आराम मिलता है। चार लाइन के बीच में एक एलईडी लगा हुआ है। सिग्नल मिलने पर मनचाहे चैनल देख सकेंगे, सिग्नल न मिलेंगे की स्थिति में  फिल्म देख सकते हैं। प्रत्येक सीट पर सेंसर है। जिसके माध्यम से सीट को आगे पीछे किया जा सकता है। हर सीट पर चार्जर और ईयरफोन के लिए प्वाइंट लगे हुए हैं। 
एक बोगी की कीमत
भारत सरकार को स्पेन की कंपनी टेलगो ने एक बोगी की कीमत वहां से आयात कराने पर सात करोड़ रुपये निर्धारित की है। भारत में बोगी बनाने के लिए अनुबंध हुआ तो यहां पर साढ़े चार करोड़ में मिलेगी। वहीं दूसरी ओर भारत में अत्याधुुनिक सुविधा युक्त बागी की कीमत भी सात करोड़ रुपये है लेकिन स्पेन की तुलना में सुविधाएं कम हैं।

आज हो सकता है पहला ट्रायल
‘गुरुवार की शाम तक स्पेन के इंजीनियरों की टीम ने कोच फिट कर लिए हैं। कोई तकनीकी परेशानी नहीं हुई तो शुक्रवार को पहला ट्रायल बरेली से भोजीपुरा के बीच 20 से 40 किलोमीटर प्रतिघंटा की स्पीड में किया जा सकता है।’ ए सी बेसरा, मुख्य कारखाना प्रबंधक, इज्जतनगर वर्कशाप

‘तैयारी पूरी हैं, सेंसर के आधार पर स्पीड, कंपन तथा अन्य ट्रायल किेए जाएंगे। टेलगो की ओर से ओके रिपोर्ट का इंतजार है। तीन फेज (बरेली-मुरादाबाद, पलवल-मथुरा और दिल्ली- मुंबई ) के बीच ट्रायल की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंप दी जाएगी। उसी के आधार पर रेल मंत्रालय निर्णय लेगा।’ नीरज श्रीवास्तव. निदेशक, आरडीएसओ लखनऊ यूनिट

‘इज्जतनगर वर्कशाप के बेहतर सहयोग से कोच ट्रायल के लिए तैयार हो गए है। इंडियन रेलवे और स्पेन की टेलगो कंपनी की संयुक्त टीम के साथ तीन फेस में ट्रायल होगा।’ सुश्री इलीना, टीम लीडर, टेलगो कोच, स्पेन
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