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Bareilly News: साइबर ठगों का नया हथियार बना टेलीग्राम, बड़े-बड़ों का बिगाड़ा काम

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अमित सक्सेना
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बरेली। साइबर ठगों ने इन दिनों टेलीग्राम को ठगी का नया हथियार बना लिया है। डिजिटल मार्केटिंग करने वालों को खासतौर से निशाना बनाया जा रहा है। ज्यादातर मामलों में इनसे ठगी की रकम भी 20 लाख रुपये से ज्यादा है। पहले मुनाफा देकर या दिखाकर उन्हें झांसे में लिया जाता है और फिर शातिर इन्हें शिकार बना लेते हैं। पुलिस लाइन स्थित मंडलीय साइबर थाने में इस साल आठ मामले दर्ज व दूसरे थानों से ट्रांसफर हो चुके हैं। यहां कुल 61 मामलों में विवेचना चल रही है।
मूवी को रेटिंग देने के बहाने महिला से 21 लाख ठगे
इज्जतनगर थाना क्षेत्र की महिला लंबे समय से डिजिटल मार्केटिंग के काम में लगी हैं। उन्हें कॉल की गई कि मूवी को रेटिंग देनी है। इसके लिए फीस दी जाएगी। टेलीग्राम से लिंक कर काम शुरू किया गया। शुरू में खाते में रकम भी बतौर कमीशन भेजी गई। फिर उनका ई वॉलेट बना दिया गया। इसमें लाखों रुपये उन्हें कमीशन के तौर पर मिला दिखाया गया। इसे अकाउंट में ट्रांसफर कराने के बहाने थोड़ा-थोड़ा करके 21 लाख रुपये ठग लिए गए।
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आर्किटेक्ट दंपती के 26 लाख उड़ा दिए
प्रेमनगर थाना क्षेत्र में आर्किटेक्ट दंपती को व्हाट्सएप पर लिंक भेजा गया कि इंस्टाग्राम व फेसबुक पर पेज लाइक करना है। इसके लिए अच्छी फीस मिलेगी। दोनों ने घर पर लैपटॉप से काम शुरू किया। इसमें व्हाट्सएप पर ही टेलीग्राम का लिंक मिला। इस पर काम करते हुए दोनों को दिखाया गया कि उनके वॉलेट में कई लाख रुपये आ गए हैं। इन रुपयों को लेने के लिए कई तरह के बहानों से 26 लाख रुपये की रकम ठग ली गई।
गोल्ड ट्रेडिंग के बहाने डॉक्टर को लगाया चूना
-प्रेमनगर के डॉक्टर का मुकदमा भी प्रेमनगर थाने से ट्रांसफर होकर साइबर थाने आया है। उनसे 21.40 लाख रुपये ठगे गए हैं। उनसे मोबाइल पर संपर्क किया गया कि गोल्ड ट्रेडिंग करने पर उन्हें मोटा मुनाफा मिलेगा। डॉक्टर ने शुरू में कुछ गोल्ड खरीदा। इसमें उन्हें मुनाफा भी दिखाया गया। वॉलेट में जो रुपये बढ़ते दिखाए जाते रहे, उन्हें लेने के नाम पर इतनी रकम की ठगी कर ली गई।
मोबाइल पर लड़की से दोस्ती, टेलीग्राम से लुटवाया
-आंवला का एक युवक पढ़ाई के बाद डिजिटल मार्केटिंग से जुड़ गया था। उसके पास एक बार नए नंबर से कॉल आई और खुद को दिल्ली से बताकर एक युवती ने बात की। मोबाइल पर ही दोस्ती हो गई। उसी युवती ने टेलीग्राम का लिंक दिया और वहां चेन सिस्टम से मेंबर बनाने के नाम पर कमीशन की पेशकश की। युवक को अपने नीचे सदस्य बनाने में शुरू में कुछ रिटर्न भी मिला। बाद में करीब 15 लाख की रकम फंस गई। मामला अब साइबर थाने में है।

पचास फीसदी से ज्यादा ठगी टेलीग्राम पर
साइबर थाना प्रभारी नीरज सिंह बताते हैं कि जितनी रकम साइबर ठगी से उड़ाई जा रही है, उसमें आधे से ज्यादा ठगी के मामले टेलीग्राम के हैं। टेलीग्राम इन दिनों साइबर ठगों की पहली पसंद बन गया है। इस साल ठगी के सर्वाधिक मामले टेलीग्राम संबंधी दर्ज या ट्रांसफर हुए हैं। कई में जांच चल रही है। पांच लाख रुपये से ज्यादा रकम की साइबर ठगी के ही मामले उनके थाने में आते हैं। फिलहाल 61 मामलों में विवेचना चल रही है।

लालच का चारा डालकर फंसाते हैं शिकार
इन दिनों यह मार्केटिंग का बड़ा हब है। इसमें चैनल बनाने की भी सुविधा है। फिल्म प्रमोशन, स्टडी प्वाइंट से लेकर यहां काफी विकल्प हैं। साइबर ठग लोगों को नई व पोर्न फिल्मों के लिंक, लुभावने ऑफर के लिंक भेजकर चारा डालते हैं। इसमें अलॉव के ऑप्शन पर बढ़ते हुए लोग यह भूल जाते हैं कि उन्होंने साइबर ठगों को उनकी निजी जानकारियों को जानने का रास्ता खोल दिया है। गोल्ड ट्रेडिंग हो या शेयर आदि का काम, पहले लोगों को कमीशन या मेहनताने के रूप में रुपये भेजते हैं। भरोसा बढ़ने पर उनकी रकम हड़पकर संपर्क बंद कर देते हैं।

यहां से जानकारी निकलवाना ज्यादा मुश्किल
साइबर विशेषज्ञ एसआई शालू यादव बताती हैं कि टेलीग्राम में व्हाट्सएप की तरह इनक्रिप्टेड मेसेज (सूचना-सामग्री का विशिष्ट कोड में रूपांतरण) का सिस्टम नहीं है। यहां बड़ा ग्रुप बनाकर ज्यादा हैवी फाइलें भेजी जा सकती हैं। साइबर ठग इन्हीं फाइलाें में वायरस भेज देते हैं जिससे ठगी की राह आसान हो जाती है। फेसबुक व व्हाट्सएप को लेकर साइबर पुलिस को आसानी से सूचनाएं मिल जाती हैं। इस एप से सूचनाएं निकलवाना मुश्किल है।

फोटो- डॉ. राकेश कुमार सिंह
साइबर ठग कई तरीकों से ठगी कर रहे हैं। टेलीग्राम से ठगी के मामले भी इनमें शामिल हैं। साइबर थाना पुलिस को और अधिक सक्रियता बरतने का निर्देश दिया गया है। लोगों को भी जागरूक रहकर काम करना चाहिए। - डॉ. राकेश कुमार सिंह, आईजी रेंज बरेली


ऐसे करें बचाव
- सिक्योर वेबसाइट से ही डिजिटल मार्केटिंग करें] जिसमें एचटीटीपी के साथ एस भी लगा हो।
- किसी वेबसाइट पर यूआरएल से पहले लॉक का सिंबल देख लें, लॉक खुला दिखे तो समझ लें कि वह सुरक्षित नहीं है।
- इंसेटिव देने के लिए साइबर ठग आपका वॉलेट बनाते हैं। कई बार इसमें आपको लाखों और करोड़ रुपये तक आपके खाते में दिखते हैं। अधिकतर मामलों में यह छलावा साबित हुआ है।
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-आपका वॉलेट या खाता खोलने के नाम पर आधार, मेल आईडी, मोबाइल नंबर जैसी सूचनाएं ली जाती हैं। कई बार साइबर ठग इनसे बैंकों में सांठगांठ कर आपके नाम से ही अलग खाता खोलकर ठगी कर लेते हैं।
- मेल या व्हाट्सएप पर टू स्टेप वेरिफिकेशन ऑन करके रखें। वर्ना व्हाट्सएप या आईडी को आसानी से हैक करके ठगी की जा सकती है।
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