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तहसीलदार को दफ्तर में बंद कर स्टाफ से मारपीट, फाइलें फाड़ीं

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बरेली। कैंट इलाके की रामेश्वर धाम कॉलोनी के प्रदीप यादव ने तहसीलदार सदर शेर बहादुर सिंह को उनके दफ्तर में बंद कर ऑफिस स्टाफ के साथ मारपीट कर दी और वहां रखी फाइलें भी फाड़ दीं। इस दौरान तहसीलदार कार्यालय में जमकर हंगामा हुआ। कोतवाली पुलिस ने प्रदीप को मौके से ही गिरफ्तार कर रिपोर्ट दर्ज की है। प्रदीप ने आरोप लगाया कि रिश्वत लेने के बावजूद उसका काम नहीं किया जा रहा था।
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तहसीलदार सदर शेर बहादुर सिंह के पेशकार लाखन सिंह की ओर से दी गई तहरीर के मुताबिक बृहस्पतिवार सुबह वह अपने कार्यालय में बैठे थे। इसी दौरान रामेश्वर धाम कॉलोनी में रहने वाला प्रदीप यादव कार्यालय पहुंचा। उसने आते ही उनके साथ गालीगलौज करनी शुरू कर दी। समझाने के बावजूद वह नहीं माना तो कार्यालय में मौजूद स्टाफ ने गालीगलौज का विरोध शुरू कर दिया।
पेशकार के मुताबिक इस पर प्रदीप ने तहसीलदार के दफ्तर का दरवाजा बाहर से बंद कर स्टाफ के साथ मारपीट शुरू कर दी। कार्यालय में रखी कई फाइलों को भी फाड़ दिया। मारपीट से कार्यालय में हंगामा मच गया। सूचना देने पर पहुंची कोतवाली पुलिस ने तहसीलदार कार्यालय में मौजूद प्रदीप यादव को गिरफ्तार कर लिया।
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दूसरे पक्ष का आरोप... रिश्वत लेकर नहीं किया काम, विरोध किया तो पीटा, रिपोर्ट भी लिखा दी
प्रदीप यादव के साथी वीर सावरकर नगर निवासी वीरेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि आशुतोष सिटी में उनकी 720 वर्ग मीटर जमीन है जिस पर कुछ भूमाफिया कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। इसकी शिकायत उन्होंने तहसीलदार सदर के अलावा आईजीआरएस पर भी की थी। वह तहसीलदार से मिले तो उन्होंने अपने अर्दली अबरार से बात करनेे को कहा। अबरार ने तहसीलदार के नाम पर पांच लाख रुपये की रिश्वत मांगी। उन्होंने 25 अप्रैल को अबरार को बतौर एडवांस 1.80 लाख रुपये दे दिए। इसके बाद तहसीलदार ने ईद के बाद आनेे को कहा। वीरेंद्र के मुताबिक बृहस्पतिवार को उन्होंने अपनी जगह प्रदीप यादव और उनके पिता धर्म सिंह को भेजा था। प्रदीप ने तहसीलदार कार्यालय में रिश्वत लेने के बावजूद काम न होने पर विरोध जताया तो तहसीलदार और उनके कर्मचारियों ने उन्हें ऑफिस में खींच लिया और उनके साथ जमकर मारपीट की। प्रदीप को चोटे भी आई है। इसके बाद तहसील स्टाफ उल्टे प्रदीप के खिलाफ ही रिपोर्ट दर्ज करा दी। वीरेंद्र ने बताया कि उन्होंने इसकी इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों से की है।
आरोपी प्रदीप के साथी ने दी वीडियो, पैसे लेता दिख रहा है तहसीलदार का अर्दली
वीरेंद्र ने बताया कि 25 अप्रैल को जब उन्होंने अर्दली अबरार को 1.80 लाख रुपये दिए थे तो उसका वीडियो भी बना लिया था। उन्होंने अमर उजाला के साथ वीडियो साझा की है जिसमें तहसीलदार का अर्दली अबरार रकम लेता हुआ दिख रहा है। रकम देने वाला अपनी परेशानी बताते हुए उससे यह भी कह रहा है कि उसके खाते में सिर्फ दो लाख रुपये पड़े हैं, इससे ज्यादा एटीएम से नहीं निकल रहे है। अबरार कह रहा है कि कुछ ज्यादा बड़ी रकम थोड़ी है। इसके बाद 20 हजार रुपये अबरार को दिए गए और 80 हजार रुपये अगले दिन देने की बात कही। अबरार ने आधी रकम देने पर एतराज जताते हुए यह भी कहा कि कुछ भी हो जाए, पूरे पैसे इकठ्ठे देना वर्ना साहब हमें डांटेंगे, अधिकारी का काम है बेटा। रकम देने वाला उससे 20 हजार ही रख लेने को कहता है लेकिन वह उसे यह रकम वापस कर देता है। वीरेंद्र के मुताबिक उन्होंने इसके बाद अबरार को और रकम दी जिसे उसने गिनकर अपने पास रखा। इसके फोटो भी उनके पास मौजूद है।
तहसीलदार सदर के ऑफिस में घुसकर स्टाफ से मारपीट की घटना की पेशकार की ओर से रिपोर्ट दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। दूसरा पक्ष अगर तहरीर देगा तो उसकी भी जांच कर आगे कार्रवाई की जाएगी। - हिमांशु निगम, इंस्पेक्टर कोतवाली
तहसील में रिश्वतखोरी पर पहले भी हो चुके हैं कई बार हंगामे
पिछले साल 23 दिसंबर को भी एक वकील ने वारिसान प्रमाण पत्र बनाने के लिए सदर तहसील के एक लेखपाल पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था। इसके बाद बार एसोसिएशन के सदस्यों ने तहसील में हंगामा किया था। तहसीलदार और अन्य अधिकारियों के साथ उनकी जमकर नोंकझोंक भी हुई थी। देर शाम प्रमाणपत्र देकर यह मामला सुलझाया गया था। जांच में पता चला कि एक लेखपाल ने अपने निजी कर्मी के जरिए प्रमाण पत्र संबंधी सत्यापन के लिए भेजा था जिसने रुपये मांगे थे। एक पुराने जमीन संबंधी विवाद के निस्तारण के लिए पिछले साल एक लेखपाल ने कार्यालय में ही घूस ली थी जिसका वीडियो वायरल होने पर तत्कालीन जिलाधिकारी ने उसे निलंबित कर दिया था।
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