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तीन तलाक पर सरकार के बाद अब उलमा मुहिम को तैयार

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बरेली। तीन तलाक बिल पास होने से उलमा में काफी बेचैनी है। इसे शरीयत पर हमला करार देते हुए वे जल्द ही जागरूकता की मुहिम शुरू करने की तैयारी में हैं। उलमा का कहना है कि तीन तलाक कानून से औरतों का ही नुकसान होगा इसलिए वे कोशिश करेंगे कि ऐसे मामले में थाने या कचहरी में जाएं ही नहीं। यह भी दावा किया जा रहा है कि 99 प्रतिशत से ज्यादा मुसलमान शरीयत पर अडिग हैं।
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कई इस्लामी तंजीम समाज के बीच तलाक और दूसरे शरई मामलात पर जागरूक करने का काम करेंगी। तीन तलाक का मुद्दा इस मुहिम में सबसे खास रहेगा। तंजीम उलमा इस्लाम, राष्ट्रीय सुन्नी उलमा कौंसिल सहित कई तंजीमें और उलमा इसके लिए आगे आ रहे हैं। इनमें खासतौर से रजा एकेडमी मुंबई, मुस्लिम जमात कालीकट, गरीब नवाज सोसाइटी रायपुर, अमीने शरीयत एजुकेशनल ट्रस्ट जामनगर आदि तंजीमें हैं जो आपस में भी बातचीत चल रही है। इसमें मौलाना शहाबुद्दीन रजवी, मौलाना इंतजार अहमद कादरी, मुफ्ती अबसार अहमद, मौलाना शहादत खां, डा. महमूद हुसैन, मौलाना ताहिर रजा फरीदी, मौलाना निजामुद्दीन, हाफिज मुजाहिद हुसैन, सूफी इकरार हुसैन, मुफ्ती मुशर्रफ कादरी, हाजी नाजिम बेग, जावेद मुजीब आदि भी इस मुहिम का हिस्सा होंगे।
ॎ तीन तलाक पर रोक लगे इसमें कोई हर्ज नहीं है। इसे वैसे भी इस्लाम में अच्छा नहीं माना गया है। मगर इस कानून दुरुपयोग होने का इमकान है। लिहाजा उलमा इस बात से भी फिक्रमंद हैं कि शौहर के सजा के बाद कोई भी समझौते की गुंजाइश नहीं बचेगी। इससे समाज में नई मुश्किलें पैदा होंगी। - मौलाना शहाबुद्दीन रजवी, महासचिव तंजीम उलमा इस्लाम
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ॎ इस्लाम खुद में एक मजबूत मजहब है। इसका कानूने शरीयत कभी न बदलने वाला है। इसमें ही तमाम ऐसे रास्ते हैं जो हर एक मसलों का हल देते हैं। इस्लाम के मानने वाले शरीयत से अलग नहीं जा सकते। उनका अमल इस्लामी शरीयत पर ही है और वह इसी के मुताबिक अपनी जिंदगी बसर करते हैं। - मौलाना इंतजार अहमद कादरी, अध्यक्ष राष्ट्रीय उलमा कौंसिल
ॎ कुछ इस्लाम से नवाकिफ लोग जरूर भटक कर तीन तलाक पर कानून को सही मान रहे हैं जबकि हकीकत में इस कानून से कोई फायदा दिखाई नहीं देता। सबसे बढ़कर जिन औरतों के लिए कानून बना है उन्हें ही इसका फायदा नहीं मिल पाएगा। ऐसा साफ दिखाई दे रहा है। इसलिए कौम में बेदारी जरूरी है। - मौलाना सईद नूरी, रजा एकेडमी
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