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शिक्षक चिंतित.. स्कूल न आए तो बच्चों को होगा नुकसान

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school - फोटो : istock
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मम्मियों ने कहा- बच्चों को स्कूल भेजने को तैयार मगर सुरक्षा की जिम्मेदारी तो लें

बरेली। कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच प्रदेश सरकार के आठवीं तक के स्कूलों की छुट्टियां बढ़ाने के फैसले से शिक्षक सहमत नहीं हैं। शिक्षकों का कहना है कि पिछला सत्र तो बुरी तरह प्रभावित हुआ ही है, इस सत्र में भी कक्षाएं निरंतरता के साथ न चलीं तो बच्चों का शैक्षिक स्तर गर्त में चला जाएगा। हालांकि मम्मियाें का मानना है कि पढ़ाई के लिए जिंदगी को दांव पर नहीं लगाया जा सकता। तब तो बिल्कुल भी नहीं जब स्कूल बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी तक लेने को तैयार नहीं हैं।
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शिक्षकों का कहना है कि सत्र 2020-21 कोरोना की वजह से खराब हो गया। लगभग पूरे सत्र स्कूल नहीं खुल पाए। अब स्कूलों में नया सत्र शुरू करने की तैयारी चल रही है। अधिकांश स्कूल अप्रैल के पहले सप्ताह में खुलने जा रहे थे तो सरकार ने फिर आठवीं तक के स्कूलों की छुट्टियां बढ़ा दी हैं। शिक्षकों का मानना है कि इसका सीधा असर बच्चों के शैक्षिक स्तर पर पड़ेगा। स्कूल आकर नियमित रूप से पढ़ाई करने का कोई और विकल्प नहीं हो सकता। बच्चों में अनुशासन की भावना भी कम होगी। लिहाजा सरकार कोविड नियमों का सख्ती से पालन कराने के साथ स्कूलों को खुलवाना चाहिए।

स्कूल आने की मानसिकता खो देंगे बच्चे

यह बच्चों को मानसिक रूप से काफी नुकसान पहुंचाने वाली स्थिति है। वे चिड़चिड़े हो रहे हैं। स्कूलों जैसा अनुशासन उन्हें नहीं मिल पा रहा है। अभिभावक खुद बता रहे हैं कि पहले वे जब बच्चों को डांटते थे तो वे माफी मांगते थे लेकिन अब पलटकर जवाब दे रहे हैं। - वीके मिश्रा, प्रिंसिपल डीपीएस

लगातार ऑनलाइन पढ़ाई कराना ठीक नहीं है। बच्चों की फिजिकल एक्टिविटी नहीं हो पा रही है। इससे उन्हें नुकसान होगा। पिछले साल कई अभिभावकों ने बच्चों को पढ़ाया ही नहीं। हो सकता है इस बार भी कई अभिभावक यही सोच रहे हों मगर इससे नुकसान बच्चों का ही होगा। - योहान कुंवर, प्रिंसिपल, विद्या भवन स्कूल

बच्चों के चिड़चिड़े होने की सबसे अधिक शिकायतें मिल रही हैं। बच्चों की एक वर्ष से कोई फिजिकल गतिविधि नहीं रही है। यह चिड़चिड़ापन इसी का परिणाम है। ऑनलाइन पढ़ाई एक विकल्प हो सकता है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं है। - श्यामेश पांडेय, प्रिंसिपल बीबीएल

बच्चों का नियमित स्कूल आना बहुत जरूरी है। ऑनलाइन पढ़ाई में कितना सिलेबस पूरा करा सकते हैं। उस तरह से पढ़ाई का माहौल नहीं बन पाता है। पिछले साल तो सीबीएसई ने करीब तीस फीसदी तक सिलेबस कम कर दिया था। इस बार यदि ऐसी स्थिति रही तो सिलेबस पूरा कराना मुश्किल होगा। - राजेश यादव, प्रबंधक मदर्स पब्लिक स्कूल

स्कूल सुरक्षा की जिम्मेदारी तो लें

बच्चों का रोजाना स्कूल जाना जरूरी है। स्कूल से उन्हें अनुशासन मिलता है, लेकिन कोरोना के समय सावधानी बरतना भी जरू री है, इसलिए फिलहाल बच्चे घर पर रहकर हीं पढ़ाई करें यही उनके लिए सुरक्षित है। - दीक्षा सक्सेना

सरकार और स्कूल प्रबंधन बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी लें, तो हमें उन्हें स्कूल भेजने में कोई दिक्कत नहीं है। हम भी पूरी एहतियात बरतेंगे।- प्रभुलीन कौर

कोरोना के मामले जिस तेजी से बढ़ रहे हैं, उससे बच्चों को बाहर भेजने की हिम्मत नहीं होती है। स्कूल भी जिम्मेदारी लेने को तैयार हों तो अभिभावक भी हिम्मत दिखाएंगे। सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी अभिभावक की रहेगी तो हम बच्चों को स्कूल नहीं भेज सकते। - दुर्गा

स्कूल जाकर नियमित पढ़ाई करना जरूरी है, लेकिन बच्चों की सुरक्षा भी अभिभावकों के लिए अहम है। ऐसे में कोरोना के तेजी से बढ़ते मामलों के बीच हम बच्चों को स्कूल कैसे भेज दें। -प्रीतपाल कौर

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