नगर निगम के टैक्स वसूली घपले में शासन से पिछले महीने निलंबित हो चुके मुख्य कर निर्धारण अधिकारी (सीटीएओ) राकेश कुमार सोनकर पर विजीलेंस जांच बिठा दी गई है। कर्मचारी नगर के तीन सौ भवनों पर कर निर्धारण में दोहरे मापदंड अपनाने में सीटीएओ निलंबित होने के बाद डीएम दफ्तर से अटैच चल रहे हैं। शासन से स्थानीय स्तर पर इस मामले की जांच अपर आयुक्त प्रशासन को सौंपी गई है।
जागर जनकल्याण समिति के सचिव डा. प्रदीप कुमार ने कर्मचारी नगर में तीन सौ भवनों के कर निर्धारण में दोहरा मापदंड अपनाकर मनमाना टैक्स लगाने की शिकायत तत्कालीन नगर आयुक्त उमेश प्रताप सिंह से की थी। नगर आयुक्त के आदेश पर नगर निगम की टीम ने कर्मचारी नगर में कर निर्धारण की जांच की तो उसमें तत्कालीन मुख्य कर निर्धारण अधिकारी राकेश कुमार सोनकर को यहां के 297 भवनों समेत भवन संख्या 112 और 113 में नगर निगम अधिनियम की धारा 214 (2) का उल्लंघन कर 6541452 रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाने का दोषी पाया गया। नगर आयुक्त की जांच रिपोर्ट के आधार पर चार फरवरी 2015 को संयुक्त सचिव उमाशंकर सिंह ने सीटीएओ राकेश कुमार सोनकर को निलंबित करते हुए उनको डीएम दफ्तर से अटैच करने के आदेश दिए। तबसे सीटीएओ जिलाधिकारी दफ्तर में ही अटैच हैं। अब निदेशक सतर्कता अधिष्ठान हृदय नारायण की टीम कर्मचारी नगर के कर निर्धारण घपले की जांच करेगी। बता दें कि कर्मचारी नगर के कर निर्धारण घपले में सचिव उत्तर प्रदेश शासन श्री प्रकाश सिंह ने सीटीएओ राकेश कुमार सोनकर पर धारा 420 के तहत एफआईआर दर्ज कराने के आदेश भी दिए थे। 40 दिन बीतने के बाद भी मामले में एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई।