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त्योहार पर मिलावट की मारः गिफ्ट हों या खानपान का बाजार, मिलावटखोरों से रहें होशियार

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त्योहार पर मिलावट की मार
गिफ्ट हों या खानपान का बाजार, मिलावटखोरों से रहें होशियार
संवाद न्यूज एजेंसी
बरेली। मुनाफाखोरी के चलते मिलावटखोर पूरी बाजार व्यवस्था पर हावी हैं। घटतौली भी आम है, इससे भले ही सेहत न बिगड़े मगर जेब पर डाका जरूर पड़ता है। त्योहार और सहालग आते ही मिलावटखोरों की मौज ही आ जाती है। बाजार में मिठाई गिफ्ट लें या ड्राई फ्रूट, गड़बड़ी से बचना मुश्किल ही होता है। आपकी रसोई भी मिलावटखोरों की जद में हे। क्योंकि आप जो घी, तेल, मसाले आदि खानपान की चीजें खरीद रहे हैं, उसकी शुद्धता की गारंटी नहीं है। ब्रांडेड कंपनियां भी मिलावट और घटतौली के आरोपों से घिरी हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने गुरुवार को डालडा और गगन जैसे नामी उत्पादों को सील किया है। इससे नामचीन कंपनियों पर भी यकीन करना मुश्किल हो रहा है।
सोना भी खरा नहीं, हो रही मिलावट
परंपरा के मुताबिक घर-घर और मांगलिक कार्यों में सोना इस्तेमाल होता है। सराफा बाजार भी मिलावटखोरी से अछूता नहीं है। जिस तरह से सोने के दाम बढ़ रहे हैं उसी तरह मिलावटखोर भी सक्रिय हैं। सर्राफा बाजार की भाषा में सोने में काला पाउडर मिलाया जा रहा है। इस काम में भले ही कम लोग शामिल हों लेकिन कहीं न कहीं ग्राहक को चूना जरूर लग रहा है। सोने के दाम के साथ ही इस काले पाउडर का भी भाव दोगुना हो गया है। इन दिनों पाउडर का भाव करीब 12 सौ रुपए प्रतिग्राम बताया जा रहा है। इस काले पाउडर का रासायनिक नाम इरीडियम बताया जाता है। नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर कुछ कारोबारियों ने बताया कि एक ग्राम पाउडर और नौ ग्राम सोना मिलाकर दस ग्राम यानी एक तोला सोना तैयार हो रहा है। यह एक ग्राम की मिलावट का मतलब दस ग्राम पर सीधे तौर पर चार हजार से अधिक मुनाफाखोरी। कारोबारियों के मुताबिक इस मिलावट की जांच भी खासा कठिन है। कैरेट और शुद्धता मापने की मशीनें भी इस पाउडर को मापने में सक्षम नहीं हैं। उन्होंने बताया कि सोने को पूरी तौर पर पिघलाकर पाउडर पकड़ में भले ही आ जाए मगर उसे अलग करना काफी मुश्किल है। इसके लिए उच्चस्तरीय तकनीकी ही अपनानी पड़ती है।
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मिठाई और बेकरी भी अछूते नहीं
खानपान की बात करें तो मिठाई और बेकरी का चलन ज्यादा होता है। मिठाई को चमकदार बनाने के लिए चांदी वर्क होता है मगर वह भी ज्यादातर नकली ही होता है। तमाम कारोबारी मिठास के लिए चीनी की जगह लिक्विड ग्लूकोज का इस्तेमाल करते हैं। मिठाइयों में आकर्षण लाने के लिए अखाद्य केमिकल युक्त रसायन का इस्तेमाल किया जाना आम है। जहां तक मिठाइयों में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल बेसन आदि की भी शुद्धता पर सवाल उठ चुके हैं और कई सैंपल भी फेल हुए हैं। श्यामगंज स्थित एक प्रतिष्ठित दुकान के लड्डू तीन बार जांच में फेल हो चुके हैं। इसी बाजार से खरीदा गया ब्रांडेड बेसन जांच में पास हुआ लेकिन मिठाई में इस्तेमाल होने पर उत्पाद लैब में खरा नहीं उतरा। यह घालमेल क्यों है यह पता नहीं। बाजार में बिक रहे बेकरी, मिठाई और अन्य खान पान संबंधी गिफ्ट कब बने और कब उसकी एक्सपायरी डेट है इसकी सही स्थिति पैकिंग पर दर्ज नहीं होती। इसलिए स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकते हैं।
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किचन तक पहुंच रही मिलावट
हल्दी, मिर्च और अन्य मसालों के पाउडर के नमूने कई बार लैब में खरे नहीं उतरे। हल्दी और मिर्च में केमिकल युक्त रंग मिलाकर उसे आकर्षित किया जाता है लेकिन चिकित्सकों के मुताबिक सेहत के लिए यह काफी नुकसानदेह है। मिलावटी खाद्य तेल और देसी घी बाजार में पटा हुआ है। सरसों का तेल के नाम पर क्या किचन तक पहुंचा, यह पता नहीं। भ्रामक पैकिंग के जरिए सरसों और कच्ची घानी जैसे नामों से खाद्य तेल बिक रहा है। ज्यादातर नमूने लैब की जांच में यह खरे नहीं उतरते हैं। हाल ही में देसी घी के नमूने फेल हुए और कारोबारी पर जुर्माना भी लगा। नेपाली रिफाइंड भी मिस ब्रांड पाया गया तो शौकीन लोगों का फास्ट फूड यानी ब्रांडेड पिज्जा भी लैब में फेल ही हुआ। जिसमें जानवर की चर्बी साबित हुई। बावजूद इसके अभी तक इसका लाइसेंस रद्द नहीं हुआ। हालांकि यह मामला एफएसडीए ने न्यायिक मजिस्ट्रेट के कोर्ट में दर्ज करा दिया है।
वर्जन:
रसायनों के इस्तेमाल से खाद्य पदार्थों का सेवन घातक बीमारी की वजह बन सकता है। के मिकल प्रयोग होने से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। मिलावटी घी, तेल और मसाले व मिठाइयों पर नकली चांदी वर्क लगाना सेहत पर भारी पड़ सकता है। लोगों को चाहिए कि वह विश्वसनीय कारोबारी से खरीदारी करें। - डॉ. वागीश वैश्य, वरिष्ठ फिजिशियन
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एफएसडीए का छापा:
गगन वनस्पति, डालडा ब्रांड सरसों का तेल जब्त
- कच्ची घानी, राजकोल्हू और पामोलिन रिफाइंड तेल नमूने भरे
संवाद न्यूज एजेंसी
बरेली। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने मिलावटखोरी के खिलाफ चल रहे अभियान के आखिरी दिन गुरुवार को गगन और डालडा जैसे ब्रांडेड उत्पादों के नमूने भरकर करीब दस लाख से ज्यादा का माल सीज कर दिया। साथ ही, विशाल मेगा मार्ट से कच्ची घानी मस्टर्ड ऑयल और बेसन के नमूने भरे। स्थानीय ब्रांड राज कोल्हू रिफाइंड, राइस ब्रांड ऑयल के नमूने भरकर चार टिन सीज कर दिए।
जिला अभिहीत अधिकारी धर्मराज मिश्रा ने अभियान के अंतिम दिन बाजार में कई जगह और कई गोदामों में छापे की कार्रवाई कराकर नमूने भरवाए। सबसे पहले विभागीय टीम फरीदपुर के ग्राम केसरपुर स्थित गोदाम पर पहुंची। यहां टीम ने गगन वनस्पति के करीब तीन लाख रुपये के 151 कार्टून (डिब्बे) और दो लाख रुपये के डालडा मस्टर्ड ऑयल के 3996 पैकेट सीज कर दिए, इससे पहले इनके नमूने लिए गए। इसके अलावा गोदाम परिसर में सवा लाख से अधिक कीमत का 860 लीटर मूंगफली तेल यानी ग्राउंड नट और करीब साढ़े चार लाख रुपये के 3524 लीटर प्योर मस्टर्ड ऑयल सीज कर दिया। इनके भी नमूने लिए गए हैं। मुड़िया जागीर में वसीम किराना स्टोर से राज कोल्हू रिफाइंड, राइस ब्रांड ऑयल का नमूना लेकर स्टॉक सीज किया। भोला किराना स्टोर से पामोलिन रिफाइंड के 12 टिन सीज किए गए। इसके अलावा न्यू पंजाब डेयरी, बहेड़ी के रोडवेज बस स्टेशन के नजदीक से घी, नकटिया के एमएस जेपी स्वीट्स से मलाई लड्डू, एनपीजी स्पेशल सूजी रस्क, सीबीगंज के अग्रवाल स्टोर से सोनपपड़ी, अनिल किराना से रिफाइंड सोयाबीन, सतीपुर की मिष्ठी डेयरी से पनीर, विशाल मेगामार्ट से कच्ची घानी, मस्टर्ड ऑयल और बेसन के नमूने भरे, जिन्हें जांच के लिए लैब भेजा जाएगा।
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बॉक्स
बांटमाप विभाग कहीं नहीं दिखा
एफएसडीए टीम ने मिलावटखोरी के खिलाफ किसी तरह अभियान गुरुवार को पूरा कर दिया मगर पूरे त्योहारी सीजन में बांटमाप विभाग की टीम नदारद रही। इसलिए घटतौली करने वालों की बल्ले-बल्ले रही और तमाम ब्रांडेड आइटम भी घटतौली से अछूते नहीं रहे। खानपान की कोई भी चीज हो, उसके पैक पर लिखी मात्रा और वास्तविक वजन में काफी अंतर है। तमाम शिकायतों के बावजूद विभागीय टीम नहीं दिखी।
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