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रसीद नहीं रियायत ले लो

Sat, 19 Mar 2016 12:27 AM IST
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
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 शहर के किसी भी बुक सेलर से किताबें खरीद लें, आपको रसीद नहीं मिलेगी। किताबों के मनमाने दाम वसूलने और टैक्स चोरी से बचने के लिए पुस्तक विक्रेता रसीद नहीं देते। यदि अभिभावक इसके लिए जिद कर भी लें तो उन्हें 10 से 15 प्रतिशत की रियायत दे दी जाती है। आयकर और वाणिज्य कर विभाग जानबूझकर मामले को नजरअंदाज किए हुए हैं। 
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किसी भी खरीदे गए सामान की अगर रसीद मिलती है तो वह एक सबूत की तरह लिया जाता है। आगे गड़बड़ी होने पर रसीद से क्लेम भी कर सकते हैं। बरेली में शिक्षा के गोरखधंधे में शामिल पुस्तक विक्रेताआें ने इससे निपटने के लिए नया तरीका अपनाया है। शहर की अधिकतर दुकानों में रसीद नहीं मिलती है। पुस्तकाें के रेट के लिए एक लिस्ट दी जाती है जिस पर सभी के दाम अंकित होते हैं। पक्की रसीद अगर अभिभावक नहीं मांगेंगे तो उन्हें नहीं मिलेगी। पैरेंट्स फोरम के संयोजक खालिद जिलानी के अनुसार कैश मेमो न होने पर हम किसी भी पुस्तक विक्रेता पर क्लेम नहीं कर सकते कि उसने हमें कौन सी किताबें किस दाम पर बेची हैं। सिर्फ प्रभावशाली लोगों को या फिर बहाने बताकर पक्की रसीद मांगनी पड़ती है। डेलापीर निवासी सरकारी कर्मचारी मोहित कश्यप बताते हैं कि उन्हें आज तक किताबों की रसीद नहीं मिली। कालीबाड़ी के अमित खंडेलवाल ने भी बताया कि हर साल तीन बच्चों की दस हजार रुपये में किताबें आती हैं लेकिन रसीद किसी की नहीं मिलती। 

जिस पर टैक्स, उसकी भी नहीं देते रसीद 
किताबों पर कोई टैक्स नहीं होता। अभ्यास पुस्तिका पर पांच फीसदी वाणिज्य कर होता है लेकिन इनकी रसीद नहीं दी जाती है। कक्षा एक से पांच तक 35, कक्षा छह से आठ तक 40 और कक्षा नौ से 12 तक 42 अभ्यास पुस्तिका कोर्स में शामिल हैं।
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अधिकतर किताब ही अभ्यास पुस्तिका बन गई है 
कान्वेंट स्कूलों की अधिकतर किताबों के पीछे कुछ न कुछ अभ्यास करने की जगह छोड़ी गई है। वाणिज्य कर के अनुसार यह भी टैक्स दायरे में है। एक बच्चे की किताब अगले साल दूसरा बच्चा न इस्तेमाल कर पाए इसलिए यह अभ्यास कॉलम का फंडा किताबों में शुरू किया गया है। 

अभ्यास पुस्तिका में यह है शामिल 
रजिस्टर, कापी, वर्क बुक, ड्राइंग, प्रैक्टिकल फाइल, टेस्ट कापी 

कोट
पुस्तिका या पुस्तक टैक्स के दायरे में आती है। इसकी अभिभावकों को रसीद मिलनी चाहिए। अगर पुस्तक विक्रेता रसीद न दें तो सीधे वाणिज्य कर दफ्तर में शिकायत करें। कार्रवाई होगी।
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-सीके पटेल, एडिशनल कमिश्नर प्रथम, वाणिज्य कर 
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