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ख्याल रखें.. खतरे से खाली नहीं है जंक्शन पर अकेले घूमना

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
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कोरोना के बाद सन्नाटा बढ़ा तो कम हो गई जीआरपी-आरपीएफ की ड्यूटी में दिलचस्पी
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अकेले यात्रियों के साथ अक्सर होती हैं लूटपाट की वारदातें

बरेली। जंक्शन पर अकेले घूमना सुरक्षित नहीं रहा। दरअसल कोरोना की वजह से जंक्शन के सन्नाटे में डूबने के बाद जीआरपी और आरपीएफ का ड्यूटी करने का चाव भी जाता रहा। पिकेट ड्यूटी सिर्फ कागजों तक रह जाने की वजह से यात्रियों के साथ हाल ही में लूटपाट की कई वारदातें हो चुकी हैं। शुक्रवार रात भी जीआरपी और आरपीएफ के जवान पिकेट ड्यूटी से गायब थे। हालांकि अफसर अब उनके बचाव की कोशिश में जुट गए हैं।
जंक्शन पर रोज जीआरपी और आरपीएफ की पिकेट ड्यूटी लगती है। जवानों पर रात में प्लेटफार्मों पर गश्त करने की भी जिम्मेदारी होती है। जीआरपी के रिकॉर्ड के मुताबिक शुक्रवार रात जीआरपी के सिपाही कामिल की पिकेट ड्यूूटी थी लेकिन लुटेरे जब विश्वजीत पर एक के बाद एक चाकू के वार कर रहे थे तो उसके काफी चीखने के बाद भी उसे कोई मदद नहीं मिली। इंस्पेक्टर जीआरपी विजय राणा के मुताबिक सिपाही कामिल से स्पष्टीकरण मांगा गया है। आरपीएफ इंस्पेक्टर विपिन सिसौदिया के मुताबिक प्लेटफार्म पर रात में नाममात्र के ही यात्री थे लिहाजा आरपीएफ के जवान यार्ड और सरकुलेटिंग एरिया में गश्त कर रहे थे।
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बता दें कि जंक्शन पर उठाईगीरी, छिनैती और जेब काटने जैसी आपराधिक घटनाएं पहले भी होती थीं लेकिन कोरोना के दौर में यात्रियों की आवाजाही कम होने के बाद जैसे-जैसे जीआरपी और आरपीएफ की गश्त कम होती गई, लुटेरों ने भी यहां ठिकाना बनाना शुरू कर दिया। हाल के कुछ महीनों में ही जंक्शन और उसके आसपास अकेले यात्रियों से लूटपाट की कई घटनाएं हो चुकी हैं। हर घटना के बाद एक-दो दिन जीआरपी और आरपीएफ सक्रियता दिखाती है, उसके बाद फिर नजर नहीं आती। इसी बेपरवाही की वजह से लूटपाट की किसी घटना का खुलासा भी नहीं हो पाया।

पता नहीं था लुटेरों का शहर है बरेली, साल भर से कर रहे थे तैयारी, छूट गई परीक्षा

पेट और पीठ के चाकू के चार वार होने के बाद भी लहूलुहान विश्वजीत ने अपना बैग नहीं छोड़ा। उनके बैग में उनका प्रवेश पत्र, एटीएम कार्ड, कुछ रकम और शैक्षिक प्रमाण पत्र थे। जिला अस्पताल में भर्ती विश्वजीत का कहना है कि उनके प्रमाण पत्र चले जाते तो उनके पास शिक्षित होने का भी कोई प्रमाण नहीं रहता और उनका भविष्य बर्बाद हो जाता। विश्वजीत ने बताया कि वह घर में सबसे बड़े हैं। घर की जिम्मेदारी संभालनी है, इसलिए लगातार कोशिश कर रहे हैं। नौकरी के लिए ही बरेली आए थे लेकिन पता नहीं था कि बरेली लुटेरों का शहर है। साल भर से तैयारी कर रहे थे लेकिन परीक्षा ही छूट गई।

बरेली पहुंचे सीओ जीआरपी ने खुलासे के लिए टीम बनाई

लूट की वारदात के बाद शनिवार को बरेली पहुंचे सीओ जीआरपी देवी दयाल ने जिला अस्पताल में विश्वजीत से पूछताछ कर बदमाशों के हुलिये की जानकारी ली। इससे पहले जंक्शन पर इंस्पेक्टर जीआरपी से भी घटना की जानकारी ली। देवी दयाल ने बताया कि घटना के खुलासे के लिए टीम बनाने का निर्देश दिया है। जल्द ही जंक्शन के आसपास घूमने वाले असामाजिक तत्वों पर शिकंजा कसा जाएगा।
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