बरेली। जानवरों से मनुष्यों को 868 तरह के गंभीर रोग होते हैं। इनमें कई जानलेवा हो सकते हैं। लिहाजा, पशु चाहे पालतू हो या घुमंतु, उसके काटने, पंजे की खरोंच लगने पर भी इलाज कराना चाहिए। पशु से लगाव में हुई जरा सी अनदेखी सेहत पर भारी पड़ सकती है।
आईवीआरआई पॉलिक्लीनिक के प्रभारी डॉ. अमरपाल सिंह के मुताबिक, इंटरनेशनल लाइव स्टॉक रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार जूनोसिस यानी प्राणीजनित रोग 1415 तरह के होते हैं। इसमें से 60 फीसदी रोग पशु, कीट, कीड़े से मनुष्यों को होते हैं। जिनके संक्रमण से पहले अगर बचाव के लिए वैक्सीन न लगी हो तो मौत होने की भी आशंका रहती है।
कुत्ते, बंदर, बिल्ली व अन्य पशुओं के काटने पर होने वाले रैबीज का इलाज अब तक नहीं मिल सका है। एहतियातन काटने के तुरंत बाद एंटी रैबीज वैक्सीन की सभी डोज लगवाना ही बचाव का उपाय है। बताया कि मच्छरजनित रोग मलेरिया, जेई, डेंगू, फाइलेरिया भी जूनोसिस रोग हैं। स्क्रब टाइफस जानलेवा रोग भी कीटों के जरिए होता है।
बचाव के उपाय
- पशुओं का नियमित टीकाकरण कराएं, छूने से बचें। छूकर हाथ जरूर धोएं।
- जानवर के सोने, रहने, खाने की अलग व्यवस्था करें। साथ न सोएं।
- असामान्य व्यवहार दिखाई देने पर जानवर की तत्काल जांच कराएं।
- बीमार गाय, भैंस, बकरी का दूध, अन्य बीमार पशु का मांस न खाएं।
- पशुओं के दड़बे, खाल, शौच की जगह की नियमित सफाई करें।