खिरना गांव में ताजिया के हाईटेंशन बिजली लाइन से छू जाने से 25 लोग झुलस गए। इनमें पांच की हालत गंभीर है। सभी को जिला अस्पताल भेजा गया है। लोगों ने जब बांस-बल्लियों से तार हटाने की कोशिश की तो उनके आपस में टकराने से तेज धमाके के साथ ताजिये में आग लग गई। जिला प्रशासन ने हादसे के लिए प्रथम दृष्टया बिजली विभाग को दोषी माना है। इस मामले में बिजली विभाग के अधिशाषी अभियंता राम पुजारत, एसडीओ विक्रम गंगवार और जेई राजीव सागर के खिलाफ बहेड़ी कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
खिरना में रविवार को दिन में 11.30 बजे आठ किलोमीटर दूर रिछा करबला के लिए ताजिया रवाना करने का एलान हुआ। इस पर गांव के लोग ताजिये के पास इकट्ठे हो गए। दोपहर 12.30 बजे ताजिये को लेकर लोग गांव से बाहर नहर के पास पहुंचे तो ताजिया रास्ते के ऊपर से गुजर रही 33 हजार केवीए बिजली लाइन के तारों से छू गया। इससे ताजिये में लगे बिजली उपकरणों में करंट फैल गया। तेज धमाके के साथ ताजिये में आग लग गई। जो लोग ताजिये को पकड़े थे वे भी करंट की चपेट में आ गए। इससे करीब 25 लोग झुलस गए।
हादसे की सूचना मिलते ही एसडीएम ममता मालवीय सीएचसी पहुंचीं और एंबुलेंस गांव भिजवाईं। तहसीलदार जलालउद्दीन को गांव भेज दिया। एंबुलेंस झुलसे लोगों को सीएचसी लेकर पहुंची तो उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद बरेली रैफर कर दिया गया। झुलसे लोगों में ज्यादातर बच्चे और नौजवान हैं। इनमें 18 वर्षीय आरिफ, आठ वर्षीय गुलफिशा, 28 वर्षीय शेर मोहम्मद, 18 वर्षीय तौसीफ और 15 वर्षीय बड़े की हालत गंभीर है।
ये लोग करंट से झुलसे
जाकिर (23), जुबैर (8), अशकरा (9), मोहम्मद यूनिस (16), नेहा (9), बाबू शाह (20), मोहम्मद रियाजुद्दीन (5), जीशान अली (20), अलीशा (12), अयाज (14), एजाज (17), राशिद (35), आशिक अली (17), बाबू खान (23), आरिफ (19), मुशर्रफ (20), आबिद अली (12), अल्ताफ अहमद (34), दानिश (42), रुखसाना, आरिफ (18), गुलफिशां (8), शेर मोहम्मद (28), तौफीफ (18), बड़े (15) आदि।
प्रशासन ने नहीं करायी थी तैयारी
बरेली। स्थानीय प्रशासन ने बहेड़ी और अन्य इलाकों में मोहर्रम और ताजियों के जुलूस मार्ग और ताजियों की ऊंचाई को लेकर कोई तैयारी नहीं कराई थी। यही वजह रही कि कई स्थानों पर रविवार आधी रात तक ब्लैक आउट रहा और लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई। बिजली विभाग ने कहा है कि प्रशासन ने कोई रोडमैप नहीं दिया। बहेड़ी में ताजिया निकालने के लिए निर्धारित से अलग रास्ता अपनाया गया। इससे हादसा हुआ। हाईटेंशन लाइन की चपेट में आकर ताजिये में आग लगने से 25 लोगों के झुलसने पर प्रशासनिक अफसर भी संदेह के घेरे में आ गए हैं। लापरवाही के चलते ही बहेड़ी शहर में 33/11 केवी लाइन से छेड़छाड़ हुई। इससे तार आपस में टकराए और स्पार्किंग से ताजियेे में आग लगी। जुलूस में कोई तकनीकी जानकार नहीं था। इससे लोग खुद ही लाइन ऊपर उठाने लगे।
नहीं दी गई कोई जानकारी
मानक के मुताबिक ताजिये कितने ऊंचे होने चाहिए और निकलते वक्त उनकी ऊंचाई क्या थी? इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। किस मार्ग पर कितने ऊंचे बिजली के तार हैं, इसका भी कोई अध्ययन नहीं किया गया। प्रशासन और पुलिस अफसरों ने बिजली विभाग से तालमेल नहीं किया गया। सब कुछ कागजों पर होता रहा। किला उपकेंद्र क्षेत्र में लाइनें अधिशासी अभियंता पीए माेंगा ने लोगों की मांग पर बंद कराई थीं। बहेड़ी में हादसा होते ही एसडीएम ने बिना किसी तकनीकी जांच के भ्रामक रिपोर्ट दे दी है। उधर, अधीक्षण अभियंता ग्रामीण तारिक वारसी ने बताया कि बहेड़ी में हुई घटना में विभाग दोषी नहीं है। जिला प्रशासन जांच करा रहा है। बिजली विभाग ने पहले ही छानबीन कर ली है।
कई घंटे बंद रखी बिजली सप्लाई
बरेली। किला उपकेंद्र क्षेत्र में ज्यादा जुलूस पहुंचने से रविवार को सुरक्षा कारणों से कई घंटे तक सप्लाई बंद रखी गई। दोपहर एक बजे से ही लाइनें बंद करा दी गईं। रात 11 बजे तक संबंधित इलाकों में बिजली गुल रही। रविवार दोपहर से ही मोहर्रम के जुलूस बाकरगंज और स्वालेनगर स्थित करबला रवाना होने लगेे। दोनों इलाके किला उपकेंद्र में आते हैं। जुलूसों में शामिल ताजिये ऊंचे थे, इसलिए सुरक्षा कारणों से सभी लाइनें बंद करा दी गईं। सप्लाई बंद होने से साहूकारा, शास्त्रीनगर, कटघर, छावनी, इंग्लिश गंज, बाजार संदल खां, जखीरा, बमनपुरी, मलूकपुर, कुंवरपुर, रामपुर मार्ग, इज्जतनगर, चौधरी तालाब, बानखाना समेत दर्जनों मोहल्ले प्रभावित रहे। इस वजह से रविवार शाम पानी की सप्लाई भी ठप रही।