ताइक्वांडो प्रशिक्षक ने छात्राओं को सिखाए आत्मरक्षा के गुर
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संकट की स्थिति में घबराएं नहीं। हर बार भागना ही विकल्प नहीं होता है। साहस को हथियार बनाकर लड़ें। सजगता और आत्मरक्षा की तकनीकें स्वयं को सुरक्षित रखने में मदद करती हैं। अगर कोई व्यक्ति जबरन हाथ पकड़ ले या नजदीक आने की कोशिश करे तो खुद को सुरक्षित एवं संतुलित रखते हुए उसे करारा जवाब दें। ये बातें ताइक्वांडो प्रशिक्षक अंजलि पटेल ने शुक्रवार को अमर उजाला की ओर से साहू रामस्वरूप महिला महाविद्यालय में आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में कहीं।
इस दौरान ताइक्वांडो प्रशिक्षक ने छात्राओं को आत्मरक्षा के गुर सिखाए। एक छात्रा के साथ लाइव डेमो देकर आत्मरक्षा की विभिन्न तकनीकों का प्रदर्शन किया, ताकि छात्राएं वास्तविक परिस्थितियों की कल्पना कर सकें और यह सीख सकें कि संकट के समय क्या करना चाहिए। प्रशिक्षक ने कहा कि बेटियों को इतना मजबूत और आत्मनिर्भर होना चाहिए कि वे किसी भी चुनौती का डटकर सामना कर सकें। उन्होंने छात्राओं को प्रेरित किया कि वे खुद को कमजोर न समझें, बल्कि अपनी क्षमता पर भरोसा रखें और आत्मरक्षा को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
छात्राओं की जिज्ञासाओं को किया शांत
प्रश्न : रोजमर्रा की जिंदगी में हम खुद को सुरक्षित रखने के लिए क्या कर सकते हैं? - सान्या अग्रवाल, छात्रा अर्थशास्त्र विभाग
उत्तर : सतर्क रहें, अपने आसपास के माहौल को समझें। आत्मविश्वास बनाए रखें और नियमित रूप से फिटनेस व बेसिक सेल्फ-डिफेंस का अभ्यास करें।
प्रश्न : आत्मरक्षा प्रशिक्षण से महिलाओं व बालिकाओं में मानसिक रूप से क्या बदलाव आता है? - वंदना मिश्रा, छात्रा एमए इतिहास
उत्तर : आत्मरक्षा का प्रशिक्षण महिलाओं व बालिकाओं के अंदर आत्मविश्वास, साहस, निर्णय लेने की क्षमता को विकसित करता है। आत्मसम्मान को मजबूती मिलती है।