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गंभीर संक्रमित मरीजों को लगाया जाता है इंजेक्शन, आपूर्ति कम होना बना बाधा
बरेली। शासन की ओर से स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए चल रही कवायद में हुक्मरान ही रोड़ा बने हुए हैं। पांच दिन पहले शुरू हुए कोविड चिकित्सालय में संक्रमित भर्ती होना शुरू हो गए हैं मगर उन्हें स्वस्थ करने के लिए आवश्यक रेमडेसिवर इंजेक्शन का अस्पताल में टोटा है। सौ रेमडेसिवर की मांग पर स्टोर से महज छह इंजेक्शन मिले। इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दी गई तो भी डिमांड के तिहाई यानी 36 इंजेक्शन ही भेजे गए।
पिछले दिनों दौरे पर आए नोडल अफसर नवनीत सहगल ने सभी कोविड चिकित्सालयों में गंभीर मरीज मिलने पर उन्हें हर हाल में तुरंत रेमडेसिवर इंजेक्शन लगाने को कहा था। कोविड चिकित्सालय में भर्ती मरीजों को पूरी सुविधा मुहैया कराने के निर्देश भी नोडल अफसर ने दिए थे। मगर स्वास्थ्य विभाग के बाबुओं की मनमानी अस्पताल संचालन पर भारी पड़ती नजर आ रही है। जिसके चलते डिमांड के सापेक्ष सप्लाई न होने से चिकित्सक परेशान हैं। सीएमएस डॉ. वागीश वैश के मुताबिक संक्रमितों के इलाज के लिए रेमडेसिवर इंजेक्शन बेहद जरूरी है। बीते दिनों सौ इंजेक्शन मांगे गए थे मगर सीएमएसडी स्टोर से छह इंजेक्शन ही भेजे गए। ऐसे में उच्चाधिकारियों को सूचना दी गई तो उन्होंने 36 इंजेक्शन भिजवाए हैं। जबकि अस्पताल में एल-2 में 4 मरीज भर्ती हैं और प्रति मरीज छह इंजेक्शन लगाने का नियम है। उन्होंने बताया कि अब 36 इंजेक्शन हैं मगर मरीजों की अनुमानित संख्या को देखते हुए यह भी कम हैं।
हफ्ता भर बीता नहीं मिली पोर्टेबल एक्सरे मशीन
कोविड चिकित्सालय के शुरुआत में अड़चन बनी पोर्टेबल डिजिटल एक्सरे मशीन अभी तक अफसर मुहैया नहीं करा सके हैं। जिसके चलते मरीजों के एक्सरे में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। बीते दिनों सीएमएस डॉ. वागीश ने एक्सरे मशीन मुहैया न होने की जानकारी नोडल अफसर को दी थी तो उन्होंने एसीएमओ डॉ. रंजन गौतम को निर्देशित किया था। मगर हफ्ता भर गुजरने के बाद भी अब तक मशीन मुहैया नहीं हो सकी है।
कोविड चिकित्सालय की भर्ती पर उठे सवाल
कोविड चिकित्सालय में बीते दिनों हुई विभिन्न पदों की संविदा भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार का आरोप लगा है। डीएम को सौंपे गए प्रार्थना पत्र में कर्मचारियों का आरोप है कि जिस फर्म की खुद स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने शिकायत की थी अब उसी से टेंडर के जरिए कर्मचारी लिए गए हैं। बता दें कि कलेक्ट्रेट में अफसरों ने संविदा कर्मचारियों के बाबत इंटरव्यू लिया था। मगर अब टेंडर एक फर्म को देने के बाद भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं।