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स्वाइन फ्लू से शहर में एक और मौत

Sun, 22 Feb 2015 01:55 AM IST
बरेली
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इस बीच जिला अस्पताल में जांच कराने पहुंचे एसडीएम मीरगंज और उत्तराखंड के एक अफसर के सैंपल भी जांच के लिए लखनऊ भेजे गए हैं। सुकून की बात ये रही कि शुक्रवार को जिला अस्पताल से जो चार नमूने लखनऊ भेजे गए थे, उन चारों की रिपोर्ट निगेटिव आई है, यानी उनमें स्वाइन फ्लू नहीं है।
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 मेडिकल कालेज से मिली जानकारी के मुताबिक स्वाइन फ्लू से पीड़ित रामपुर के बुजुर्ग का परिवार इससे पहले दिल्ली के एक बड़े अस्पताल में उनका इलाज करा रहा था। वह वहां चार दिन से भर्ती थे। इस अस्पताल का खर्च काफी ज्यादा होने के कारण परिवार के लोगों ने उन्हें शुक्रवार को ही यहां एक मेडिकल कालेज में भर्ती कराया था। शनिवार को उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगी और कुछ ही देर बाद उन्होंने दम तोड़ दिया। बता दें कि इससे पहले जनवरी में स्वाइन फ्लू से पीड़ित सीबीगंज की एक महिला की मौत हो गई थी।
शुक्रवार को जिला अस्पताल से चार संदिग्ध लोगों के नमूने लखनऊ भेजे गए थे। इनकी रिपोर्ट देर शाम आई है। सीएमओ डॉ. विजय यादव ने बताया कि चाराें की रिपोर्ट निगेटिव हैं। इनमें एक मीडियाकर्मी समेत, एक आठ वर्षीय बच्चा व दो पुरुष 26 व 36 साल के हैं।
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दहशतजदा अफसर जांच कराने पहुंचे
स्वाइन फ्लू की दहशत अधिकारियों में भी दिख रही है। शनिवार को जिला अस्पताल में एसडीएम मीरगंज और उत्तराखंड के एक अधिकारी जांच कराने पहुंचे। इनके सैंपल लेकर लखनऊ भेज दिया गया है। एसडीएम मीरगंज पिछले दिनों लखनऊ गए हुए थे। वहां से लौटे तो जुकाम और खांसी के साथ गले में खराश हो गई। इस पर वह शनिवार को जिला अस्पताल में जांच कराने पहुंचे। यहां सर्विलांस टीम और डॉक्टराें ने उनकी जांच की और सैंपल लेकर वापस भेज दिया। उत्तराखंड के एक प्रशासनिक अधिकारी भी जांच कराने जिला अस्पताल आए। इसके अलावा पुराना शहर की एक महिला और एक पुरुष के भी सैंपल लिए गए हैं। चारों लोगों को टेमिफ्लू दवा भी दी गई है।

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गंदगी को लेकर हजियापुर में हंगामा
हजियापुर इलाके के बाशिंदों ने वहां व्याप्त गंदगी को लेकर हंगामा किया। उनका कहना है कि स्वाइन फ्लू के खौफ के बीच साफ-सफाई का भी ध्यान रखा जाना चाहिए, क्योंकि गंदगी संक्रामक रोगों को दावत दे सकती है। गुस्साए लोगों ने स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम के खिलाफ नारेबाजी की। लोगाें का कहना था कि पिछले कई दिनों से नालाें का कूड़ा और गली में गंदगी सड़क पर ही पड़ी हुई है। इसे साफ नहीं किया जा रहा है।

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 वैक्सीन भी ज्यादा असरदार नहीं

बरेली। मौसम बदलते समय कई वायरस तेजी से फैलते हैं। स्वाइन फ्लू का वायरस एच1 एन1 भी इनमें से एक है। यह साधारण फ्लू की तरह है लेकिन पिछले सालाें की तुलना में इस बार कुछ ज्यादा भयंकर नजर आ रहा है। यह कहना है एसआरएमएस मेडिकल कालेज में कार्यशाला में अलग-अलग शहरों से आए चार पल्मोनरी विशेषज्ञाें का।
जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अलीगढ़ के प्रो. मोबीद अहमद, केजीएमयू लखनऊ के प्रो. राजीव गर्ग, जेपी हॉस्पिटल नोएडा के डॉ. विरोत्तम तोमर और सुशीला तिवारी राजकीय मेडिकल कालेज हल्द्वानी के प्रो. रामगोपाल नौटियाल अपने-अपने शहराें में स्वाइन फ्लू की समस्या को देख रहे हैं। इन चारों विशेषज्ञाें की राय है कि देश में करोड़ों लोगाें की जांच कर पाना आसान नहीं है। इसलिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने तय किया है कि सी कैटेगरी के रोगियों की ही जांच की जाए। उनका कहना है कि स्वाइन फ्लू के मामलों में वैक्सीन सिर्फ 40 से 60 फीसदी ही असरकारक है। वायरस की श्रेणी बदलते ही वैक्सीन काम करना बंद कर देती है। फ्लू का सीजन शुरू होने से दो माह पहले वैक्सीन लगवा लेनी चाहिए। स्वाइन फ्लू बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, एचआईवी पीड़ित, अस्थमा रोगी, टीबी रोगी और कम प्रतिरोधक क्षमता वालाें को तेजी से होता है। आजकल मोटे होने के लिए युवा स्ट्रायड का प्रयोग ज्यादा कर रहे हैं। यह भी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम करता है। हल्द्वानी के डॉ. नौटियाल ने बताया कि तापमान बढ़ने के बाद स्वाइन फ्लू के मामले कम हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि तापमान कम होने के बाद भी हल्द्वानी में अभी तक दो संदिग्ध मामले ही आए हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि पहाड़ों पर लोगाें का जमावड़ा और भीड़भाड़ कम होती है।
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