प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की सफलता के जिस जोर-शोर से दावे किए जा रहे हैं, जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट है। बीमा कंपनी से क्लेम लेने में किसानों के पसीने छूट रहे हैं। दो साल से ज्यादा हो चुके हैं और बीमा कंपनी ने शहर में अपना कोई दफ्तर नहीं बनाया। इस वजह से किसान फसल बीमा संबंधी शिकायतें करने के लिए दर-दर भटकते हैं। उनकी फसलों का निर्धारित 48 घंटे के अंदर सर्वे नहीं हो पाता, फिर बीमा कंपनी क्लेम देते समय इतने सवाल खड़े कर देती है कि अधिकांश किसान फसल नष्ट होने के बाद भी क्लेम से वंचित हो रहे हैं।
फसल बीमा योजना में केवल अधिसूचित फसलों (खरीफ में धान, मक्का, तिल, मूंग, उड़द और रवी में धान, गन्ना आदि ) का ही बीमा हो पाता है। गन्ने के बीच में अगर धान की फसल है तो वह बीमा के दायरे में नहीं आएगी। उत्तर प्रदेश के 60 से ज्यादा जनपदों में फसल बीमा का काम एआईसी इंश्योरेंस कंपनी को दिया गया है। कंपनी फसल सुरक्षा बीमा में अधिकांश केसीसी धारक किसानों को ही शामिल करती है। कृषि विभाग की मानें तो वर्ष 2016 में खरीफ सीजन में 53 816 किसानों ने 43403 हेक्टेयर फसल का बीमा कराया। इसमें पांच करोड़ से ज्यादा का प्रीमियम कंपनी को मिला। फसल बीमा मात्र 1208 किसानों को 32 लाख रुपये मिला। खरीफ में क्लेम न मिलने से निराश किसानों ने फसल बीमा कराने में रुचि कम करनी शुरू कर दी। इसी वर्ष 2016 रवी सीजन में मात्र 18 हजार किसानों ने फसल बीमा कराया। उसका बीमा क्लेम अब तक नहीं मिला।
किसानों के हस्ताक्षर नहीं
इंश्योरेंस कंपनी से किसी भी किसान का फसल बीमा करते समय उसके हस्ताक्षर नहीं कराए जाते। किसान इस पर कई बार आपत्ति जता चुके हैं लेकिन बीमा कंपनी के अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं देते। बीमा कंपनी सीधे शासन से संचालित है, इसलिए कृषि विभाग और अन्य अधिकारी भी फसल नष्ट होने पर क्लेम दिलाने में रुचि नहीं दिखाते।
लागत से कम बीमा
बीमा कंपनी प्रति एकड़ 20 हजार की लागत वाली फसल का बीमा 18 हजार तक ही करती है। अगर किसी किसान की 20 हजार की लागत की फसल प्राकृतिक वजहों से नष्ट होती है तो उसको अधिकतम क्लेम 18 हजार तक ही देने का प्रावधान रखा है। हालांकि फसल नष्ट होने का क्लेम सर्वे रिपोर्ट पर निर्भर होता है। किसी भी फसल नष्ट होने का क्लेम पाने के लिए 48 घंटे के अंदर उस खेत का सर्वे होना जरूरी है।
टोल फ्री नंबर बंद
इंश्योरेंस कंपनी ने फसल बीमा संबंधी शिकायतों के समाधान के लिए टोल फ्री नंबर 18001030061 जारी किया है। ये नंबर अधिकांश बंद रहता है। जिला कृषि अधिकारी डा. रामतेज यादव ने कई बार किसानों की समस्या का समाधान कराने के लिए नंबर लगाया तो वह बंद मिला।
इन नंबरों पर करें शिकायत
एआईसी इंश्योरेंस कंपनी के क्षेत्रीय अधिकारी सुरेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि बरेली में किसी जिले में कंपनी का दफ्तर नहीं खोला गया है। किसान टोल फ्री नंबर पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। अगर टोल फ्री नंबर नहीं मिलता है तो 0522-262173, 2612866, 2612627 पर लखनऊ फोन कर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। टोल फ्री नंबर प्राकृतिक आपदा का क्लेम पाने की शिकायत दर्ज कराने के लिए है।
गाइड लाइन नहीं आई
वर्ष 2017-18 में खरीफ की फसलों का सीजन निकल चुका है। रवी का सीजन में अब तक फसल बीमा की कोई गाइड लाइन सरकार की तरफ से नहीं आई है। जिला कृषि अधिकारी डा. रामतेज यादव का कहना है कि सरकार की गाइड लाइन आने के बाद ही फसल बीमा पर काम आगे बढ़ेगा।