बरेली में तीन दिन तक चला घटनाक्रम
अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी के नए प्रावधानों में सवर्णों के हित की अनदेखी और प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की पिटाई से आहत होकर 26 जनवरी को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। देर रात प्रदेश सरकार ने उन्हें निलंबित कर शामली के जिलाधिकारी कार्यालय से संबद्ध कर दिया था। बरेली के मंडलायुक्त को मामले की जांच सौंपी थी। मंगलवार को दिनभर अलंकार और उनके समर्थकों का धरना-प्रदर्शन, नारेबाजी और हंगामा चलता रहा। इसके बाद उनके आवास पर फोर्स तैनात कर दी गई। उन्हें बाहर ही नहीं निकलने दिया गया।
इसे लेकर अलंकार ने कहा था कि उन्हें नजरबंद किया गया और सीसी कैमरे लगाकर उनकी निगरानी कराई जा रही है। इस बीच वह आवास के गेट तक आए। ताला लगा होने के कारण अंदर से ही पत्रकारों से मानवाधिकार और निजता के अधिकार के हनन की बात कहकर लौट गए। बुधवार को दोपहर एक बजे के बाद उनके लिए निजी कार मंगाई गई। उन्हें पुलिस और प्रशासन के कर्मियों के साथ लखनऊ के लिए रवाना कर दिया गया। हालांकि, एडीएम सिटी सौरभ दुबे ने बताया कि अग्निहोत्री अपनी इच्छा से बरेली से गए हैं। उन्हें जबरन नहीं भेजा गया है।