राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना और अल्पसंख्यक शादी अनुदान योजना में फर्जी प्रमाणपत्र लगाने में अब बहेड़ी तहसील से भी कार्रवाई की गई है। फर्जी प्रमाण पत्रों को सही ठहराने वाले दो लेखपालों को एसडीएम ने सस्पेंड कर दिया है जबकि छह लेखपालों को चार्जशीट दी गई है। उन पर भी निलंबन की तलवार लटकी हुई है। एसडीएम का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद इनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।
समाज कल्याण विभाग की राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना में बहेड़ी तहसील के 16 मृत्यु प्रमाणपत्र और अल्पसंख्यक शादी अनुदान योजना के 40 आय प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए थे। डीएम ने एसडीएम को इन सभी प्रमाण पत्रों की जांच के आदेश दिए थे। एसडीएम ने लंबी जांच के बाद अब जाकर लेखपालों की भूमिका उजागर की है। जांच में पाया गया कि तहसील के आठ लेखपालों ने फर्जी प्रमाणपत्रों को सही बताकर संस्तुति की थी। तहसीलदार और फिर एसडीएम ने उन पर अपने हस्ताक्षर किए थे। एसडीएम ने दो लेखपाल- नरोत्तम कुमार और अनूप शर्मा की भूमिका पूरी तरह से साबित कर उन्हें तो शुक्रवार को सस्पेंड कर दिया। बाकी छह लेखपालों को चार्जशीट दी गई है। कार्रवाई के लिए उनके स्पष्टीकरण का इंतजार है। एसडीएम रामेश्वर नाथ तिवारी का कहना है कि जल्द ही इन लेखपालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद लेखपालों और फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ भी एफआईआर कराई जाएगी।
समाज कल्याण के दो बाबुओं से काम छिना
तहसीलों में लेखपालों पर कार्रवाई के बावजूद चुप्पी साधकर बैठे जिला समाज कल्याण अधिकारी ने अपने कार्यालय के दो लिपिक से पारिवारिक लाभ योजना का पटल हटा दिया है। अब तक पटल देख रहे रईसुद्दीन से हटाकर पटल राजीव कुमार को दिया गया था लेकिन अब उनसे भी हटाकर रामदास को दिया गया है। जिला समाज कल्याण अधिकारी एके सिंह का कहना है कि जांच की प्रक्रिया में इन लिपिकों से पटल हटाए गए हैं। उन्होंने बताया कि तहसीलों से एसडीएम की जांच रिपोर्ट अभी नहीं मिली है। जांच में अगर किसी कर्मचारी की भूमिका सामने आएगी तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
इंसेट-
तीन महीने में हुई जांच
अक्टूबर में जांच मिलने के बावजूद तहसील में तैनात एसडीएम के खास बाबू फाइलों पर कुंडली मारकर बैठ गए। कारण, एसडीएम और तहसीलदार पर कार्रवाई न करने का राजनीतिक दबाव पड़ रहा था। वहीं बहेड़ी एसडीएम ने भी आवेदनों का सत्यापन किया था। मामला अखबारों में उछला तो एसडीएम ने माल बाबू सुनील जौहरी को बुलाकर क्लास लगाई और फाइलों को निकलवाया। जांच शुरू की गई तो अधिकारियों के पैरों तले की जमीन ही खिसक गई। एसडीएम का कहना है कि जांच आगे भी चल रही है। जिनकी भूमिका सामने आएगी, कार्रवाई की जाएगी।
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लेकिन रैकेट तक नहीं पहुंचे हाथ
लेखपालों पर कार्रवाई तो हो रही है लेकिन फर्जीवाड़े को अंजाम देने वाले दलालों के रैकेट तक अभी भी हाथ नहीं पहुंचे हैं। बहेड़ी तहसील में भी रैकेट के कई सदस्य सक्रिय हैं, जिन्होंने गांव-गांव अपना नेटवर्क बिछाया है और फर्जीवाड़े से वह मालामाल हो चुके हैं। लेखपालों और अभ्यर्थियों से पूछताछ में रैकेट के लोगों के नाम सामने आ सकते हैं इसके बावजूद अफसर हाथ नहीं डाल रहे हैं। हालांकि एसडीएम का कहना है कि अब रैकेट का भी पर्दाफाश करेंगे।