हाजी अली दरगाह पर कोर्ट के फैसले पर बरेलवी मरकज की प्रतिक्रिया
सुप्रीम कोर्ट में अपील करे दरगाह प्रबंधन
बरेली। दरगाह आला हजरत स्थित सुन्नी बरेलवी मरकज महिलाओं के कब्रिस्तान और मजार शरीफ जाने के खिलाफ है। वह इसे जायज नहीं मानता। लिहाजा मुंबई में हाजी अली की दरगाह पर महिलाओं के जाने की रोक हटाने के फैसले पर सहमत नहीं है। मरकज के लोगों ने भले ही कोर्ट पर टिप्पणी नहीं की है, मगर हाजी अली दरगाह के प्रबंधन से इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जाने की सलाह जरूर दी। इसमें कुछ जिम्मेदार लोगों ने इस मुद्दे पर शरियत और आला हजरत के फतवों के हवाले से अपनी प्रतिक्रिया दी है।
समीक्षा करें बड़े मुस्लिम वकील: सज्जादानशीन
दरगाह आला हजरत के सज्जादानशीन मौलाना अहसन रजा खां कादरी ने कहा कि मुंबई हाईकोर्ट का जो फैसला दरगाह हाजी अली पर महिलाओं के जाने के संबंध में आया है, इस फैसले की समीक्षा बड़े मुस्लिम वकीलों से करवानी चाहिए। इसके बाद बहुत मजबूती के साथ सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा लड़ना चाहिए। मुस्लिम वकीलों से भी अपील है कि वे खुद इसमें दिलचस्पी लें।
कब्रिस्तान में न जाएं मुस्लिम महिलाएं: मुफ्ती सलीम
दारुल इफ्ता मंजरे इस्लाम के मुफ्ती व दरगाह आला हजरत के प्रवक्ता मोहम्मद सलीम नूरी ने कहा कि ऐसा लगता है कि हाजी अली दरगाह प्रबंधन मुंबई हाईकोर्ट के समक्ष अपना इस्लामी पक्ष मजबूती के साथ नहीं रख सका। जबकि हमारे पैगंबर अलैहिस्सलाम का हुक्म है कि मुस्लिम महिलाएं कब्रिस्तान या कब्रों पर न जाएं। कोर्ट का फैसला देखकर दरगाह ट्रस्ट को मजबूती से सुप्रीम कोर्ट में शरियत का पक्ष रखना चाहिए। दरगाह ट्रस्ट से हम अपील करते हैं कि वह जिस वकील से इस मुकदमे की पैरवी कराए उन्हें आला हजरत इमाम अहमद रजा खां की इस टॉपिक पर लिखी किताब ‘मजारात पर औरतों की हाजरी’ को जरूर पढ़वा दें। वकील को बहुत मजबूत साक्ष्य और दलीलें मिल जाएंगी। साथ ही मुस्लिमों की ये जिम्मेदारी बनती है कि वे अपनी शरियत के उसूलों पर चलते हुए अपने घर की औरतों को दरगाह और कब्रिस्तान पर न जाने दें।