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UP Budget 2026: गन्ना मूल्य में 30 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी, बरेली के 1.41 लाख किसानों को मिलेगा फायदा

Thu, 12 Feb 2026 10:53 AM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

यूपी सरकार ने पेराई सत्र 2025-2026 के लिए गन्ना मूल्य दर में 30 रुपये प्रति कुंतल की वृद्धि की है। इससे बरेली जिले के 1.41 लाख किसानों को लाभ होगा। हालांकि किसानों का यह भी कहना है कि गन्ने का न्यूनतम मूल्य 500 रुपये होना चाहिए। 
 
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खेत में खड़ी गन्ना की फसल। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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पेराई सत्र 2025-26 के लिए गन्ना मूल्य में 30 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि से बरेली जिले के 1.41 लाख किसानों को लाभ हुआ है। इन किसानों को बढ़ी दर पर 76.80 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान मिलने की उम्मीद जगी है। हालांकि, किसान इस वृद्धि से बहुत खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि बाजार में खोई का दाम भी 500 रुपये से अधिक है।

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जिले में बहेड़ी, सेमीखेड़ा और नवाबगंज क्षेत्र में सर्वाधिक गन्ना उत्पादन होता है। सर्वे के मुताबिक, इस बार 1.41 लाख किसानों ने गन्ने की खेती की है। गन्ना विभाग ने चालू पेराई सत्र में 256 लाख क्विंटल गन्ना खरीद का लक्ष्य रखा है। इसमें अधिकतर गन्ना अर्ली प्रजाति का ही है। इस तरह 30 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गन्ना मूल्य बढ़ने से किसानों को 76.80 करोड़ रुपये का सीधा फायदा होगा। 

घट रहा उत्पादन, बढ़ रहे खर्चे 
फरीदपुर ब्लॉक के गांव पचौमी निवासी किसान सोमवीर सिंह के पास वर्तमान में 50 बीघे गन्ने की फसल है। उन्होंने बताया कि पहले वह पांचों भाई मिलकर 150 बीघे में गन्ने की फसल बोते थे, लेकिन बिचौलियों की वजह से एमएसपी पर गन्ना बेचना मुश्किल है। लागत बढ़ने और बिक्री में आ रही दिक्कतों की वजह से गन्ना किसान घाटे में जा रहा है। यही कारण है कि 40 फीसदी किसानों ने इसकी बोआई ही बंद कर दी है। 
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शाहपुर बनियान के सत्येंद्र सिंह के पास 100 बीघे खेती है। 80 बीघे में उनकी गन्ने की फसल है। सत्येंद्र का कहना है कि गन्ने का न्यूनतम मूल्य 500 रुपये होना चाहिए। 25-30 क्विंटल प्रति बीघे उत्पादन हो रहा है। 70 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर गन्ने की छिलाई हो रही है और क्रय केंद्र पर गन्ना ले जाने पर 20 रुपये प्रति क्विंटल भाड़ा देना पड़ता है। गेहूं-धान बेचने में सरकारी क्रय केंद्र पर बिचौलिये हावी रहते हैं।

नवाबगंज-बहेड़ी मिलों पर पिछले सत्रों की बकायेदारी
नवाबगंज की ओसवाल शुगर मिल पर किसानों का पिछले दो वर्षों का कुल 57.45 करोड़ रुपये बाकी है। इसमें वर्ष 2023-24 का 18 करोड़ और वर्ष 2024-25 का 39.45 करोड रुपये गन्ना मूल्य शामिल है। इसके अलावा मिल पर सहकारी गन्ना समिति का बकाया और ब्याज समेत कुल 70 करोड़ रुपये की बकायेदारी है। शासन-प्रशासन की तमाम कोशिश के बाद भी चीनी मिल ने इसका भुगतान नहीं किया है। बहेड़ी की केसर चीनी मिल पर भी किसानों का गन्ना मूल्य बकाया चल रहा है।

689 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य बाकी
वर्तमान में जिले की पांच चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का 689.48 करोड़ रुपये बकाया चल रहा है। हालांकि, यह बकाया राशि 14 दिन के अंतराल पर खरीदे गए गन्ना मूल्य की है। इसलिए भुगतान के मामले में चीनी मिलों को अभी डिफाल्टर नहीं माना गया है। फरीदपुर चीनी मिल पर 225.30 करोड़, बहेड़ी पर 164.97 करोड़, मीरगंज पर 234.87 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य बकाया है। इसी तरह बहादुरगंज चीनी मिल पर 20 लाख और सहकारी चीनी मिल सेमीखेड़ा पर 64.14 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य बकाया है। 
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डीजल आधारित नलकूपों को मिलेगी सौर ऊर्जा की सुविधा
जिले में डीजल आधारित नलकूपों को सौर ऊर्जा की सुविधा देने की बात बजट में कही गई है। हालांकि, पीएम किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) में पिछले साल 703 डीजल आधारित नलकूपों को सौर ऊर्जा से जोड़ा गया है। इस साल भी 41 किसानों को इस योजना का लाभ दिया जा रहा है। 

पिछली बार 1189 किसानों ने अपने डीजल आधारित नलकूपों को सौर ऊर्जा से जोड़ने की मांग की थी। इसमें 736 के आवेदन स्वीकृत हुए थे। 703 किसानों के नलकूपों को सौर ऊर्जा से जोड़ने का काम पूरा हो गया है। इस बार 63 किसानों ने बुकिंग कराई थी। उप निदेशक कृषि हिमांशु पांडेय ने बताया कि 63 में केवल 41 किसानों ने ही अंशदान जमा किया है। नए बजट में किए गए प्रावधानों से जिले को मिलने वाले लक्ष्य में वृद्धि होगी और इसका लाभ किसानों को मिलेगा। 
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