होली का त्योहार नजदीक है, लेकिन चीनी मिलें किसानों का गन्ना भुगतान दबाए बैठी हैं। बरेली मंडल की चीनी मिलों पर 616.41 करोड़ रुपये बकाया है, जबकि खरीद के 14 दिन के अंदर भुगतान का नियम है।
चीनी मिलें बरेली मंडल के किसानों का 616.41 करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान दबाए बैठी हैं। कई बार मांग के बाद भी भुगतान खातों में नहीं भेजा जा रहा। इसको लेकर अब उप गन्ना आयुक्त ने बकायेदार चीनी मिलों के नाम नोटिस जारी किए हैं। उनसे बकाया भुगतान का शेड्यूल मांगा गया है। शेड्यूल का पालन न करने पर आरसी जारी करने की बात कही है।
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जिले में नवाबगंज की ओसवाल चीनी मिल ने इस साल खरीदे गए गन्ने का एक भी रुपया किसानों को नहीं दिया है। चीनी मिल पर बीते पेराई सत्र का भी 23 करोड़ रुपये बकाया है। कुल बकायेदारी 55 करोड़ की है। बहेड़ी की केसर चीनी मिल ने जिन किसानों से गन्ना खरीदा है, उनमें से 84.55 प्रतिशत को भुगतान नहीं किया है। चीनी मिल पर कुल 176.35 करोड़ रुपये का बकाया है।
गन्ना क्रय अधिनियम के तहत खरीद के 14 दिन के अंदर भुगतान का नियम है। लेकिन अधिकतर चीनी मिलों ने इसका पालन नहीं किया। जिले में फरीदपुर और मीरगंज को छोड़ दें तो सहकारी चीनी मिल सेमीखेड़ा, नवाबगंज की ओसवाल और बहेड़ी की केसर चीनी मिल, तीनों ही समय पर भुगतान नहीं कर रहीं।
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उप गन्ना आयुक्त राजीव राय ने बताया कि फिलहाल बकायेदार चीनी मिलों से भुगतान का शेड्यूल मांगा गया है। शेड्यूल पर अमल न होने पर आरसी (वसूली सर्टिफिकेट) जारी कर भू राजस्व की भांति बकाया वसूली की संस्तुति करेंगे।
(बजाज ग्रुप की चीनी मिलों में इस पेराई सत्र में गन्ना देने वाले 85 प्रतिशत से अधिक किसानों का गन्ना मूल्य फंसा हुआ है)
जनपदवार बकाया का विवरण
बरेली जिले की चीनी मिलों पर 192 करोड़ 23 लाख, पीलीभीत की चीनी मिलों पर 165 करोड़ 20 लाख रुपये का बकाया है। शाहजहांपुर में 146 करोड़ 46 लाख, बदायूं में 69 करोड़ 35 लाख रुपये की देनदारी चीनी मिलों पर है। कासगंज की न्योली शुगर मिल पर 43 करोड़ 38 लाख रुपये बकाया है।