बरेली। स्कूलों में अचानक छुट्टी कर दी गई। पापा के पास फोन आया तो वह ऑफिस में थे। उन्होंने मुझे फोन करके छोटी बहन को स्कूल से लाने के लिए कहा। मां और दादी भी घबरा गईं कि अचानक स्कूल से फोन क्यों आया है, क्या हो गया है? माहौल कैसा है? किस रास्ते से जाने दिया जाएगा? आदि सवाल मन में आने लगे। आसपास के अन्य लोग भी अपने बच्चों को लेने के लिए स्कूल की ओर दौड़े। सिविल लाइंस निवासी राजवीर ने ये बातें कहीं।
इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन की ओर से शुक्रवार को अचानक आधे दिन में ही छुट्टी करने के आदेश ने अभिभावकों को परेशान किया। शहर में जगह-जगह आपाधापी की स्थिति रही। चौकी-चौराहा और पुराने शहर में बवाल की अफवाहें फैलने लगीं। कई लोगों ने पुलिस और मीडिया के लोगों को फोन करके स्थिति को जानने का प्रयास किया। बाजार बंद होने को लेकर भी चर्चाएं होने लगीं। अभिभावक अपना काम छोड़कर बच्चों को लेने पहुंचे।
अचानक बच्चों को स्कूल से ले जाने का फोन आया। इससे मन में कई सवाल उठे। परिवार की महिलाएं बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता करने लगीं। आसपास के अभिभावक भी परेशान हुए। यह नहीं होना चाहिए था। - बॉबी, अभिभावक
अचानक फोन आने से परेशानी हुई। सबसे खराब यह लगा कि एक व्यक्ति विशेष ने पूरे शहर की स्थिति खराब कर दी। स्कूल से कॉल आने पर अपने सभी काम छोड़कर तुरंत बच्चों को लेने जाना पड़ा। - दीपक जुनेजा, अभिभावक
मेरा बच्चा बेदी इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ता है। अचानक फोन आने पर तुरंत लेने भागना पड़ा। अगर स्थितियां पहले से खराब थीं तो प्रशासन को छुट्टी कर देनी चाहिए थी। असामाजिक तत्वों को आजादी नहीं देनी चाहिए। - भारत कवलानी, अभिभावक
फोन आया तो पता नहीं लगा कि क्या विवाद हो गया है। समय से बच्चों को लाने की आपाधापी में कई अभिभावकों को काफी परेशानी हुई। इस तरह शहर में अव्यवस्था फैलाना सही नहीं है। - रचित जायसवाल, अभिभावक