आंवला/रामनगर (बरेली)। कपड़े की फेरी लगाने वाले एक शख्स ने सुसाइड नोट में चौकी इंचार्ज पर गांव के ही युवक के साथ गई बेटी की बरामदगी के लिए एक लाख रुपये मांगने का आरोप लगाते हुए खुदकुशी कर ली। मौके पर पहुंचे चौकी इंचार्ज के सुसाइड नोट को फाड़कर फेंक देने पर भड़के गांव वालों ने उन्हें बंधक बना लिया। फोर्स लेकर सीओ उन्हें छुड़ाने पहुंचे तो उन पर भी पथराव कर दिया। इसमें दो सिपाही घायल हो गए। एसएसपी ने चौकी इंचार्ज और एक सिपाही को लाइन हाजिर कर एसपी देहात को जांच सौंपी है।
गांव मऊचंदपुर में रहने वाले 45 वर्षीय शख्स ने सोमवार सुबह घर में ही पंखे से बंधे फंदे में लटककर खुदकुशी कर ली। फेरी लगाकर कपड़ा बेचने वाले इस शख्स की बेटी चार दिन पहले गांव के ही एक युवक के साथ चली गई थी। आरोप है कि पुलिस उसे जानबूझकर बरामद नहीं कर रही थी। गांव वालों के मुताबिक फेरी व्यापारी की जेब से मिले सुसाइड नोट में उसने अपनी मौत का जिम्मेदार रामनगर चौकी के इंचार्ज को बताते हुए लिखा था कि वह उसकी बेटी ढूंढने के लिए एक लाख रुपये मांग रहा था।
खुदकुशी की सूचना पर रामनगर चौकी इंचार्ज रामरतन सिंह सिपाहियों के साथ मौके पर पहुंचे तो गांव वालों ने सुसाइड नोट फाड़कर फेंक देने का आरोप लगाते हुए उन्हें बंधक बना लिया। यह सूचना मिलने पर सीओ चमन सिंह चावड़ा कई थानों की पुलिस और आरएएफ के साथ गांव पहुंचे। चौकी इंचार्ज को छुड़ाने की कोशिश के दौरान एक सिपाही ने डंडा चलाया तो गांव वालों ने पथराव कर दिया। सिपाही अर्जुन सिंह और धीरज इसमें घायल हो गए। इसके बाद चौकी इंचार्ज को छुड़ाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। पुलिस और गांव वालों में टकराव के बीच गांव पहुंचे पूर्व सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह और भाजपा के आंवला जिलाध्यक्ष वीर सिंह पाल ने एसपी देहात राजकुमार अग्रवाल से बात की और चौकी इंचार्ज के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन देकर लोगों को शांत किया।
चौकी इंचार्ज को लाइन हाजिर कर एसपी देहात को पूरे मामले की जांच करने को कहा है। जांच के बाद आगे कार्रवाई की जाएगी। - रोहित सिंह सजवाण, एसएसपी