बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के विद्यार्थी और शोधार्थी जल्द ही आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई), वर्चुअल रिएलिटी (वीआर), मशीन लर्निंग तकनीक का इस्तेमाल करते नजर आएंगे। वहीं, शिक्षक भी समय की मांग के अनुसार खुद को तकनीकी रूप से अधिक निपुण बना सकेंगे। ये सब परिसर में बनने वाले डिजिटल लर्निंग हब से साकार हो सकेगा।
डिजिटल लर्निंग हब में विद्यार्थी डिजिटल संसाधनों का अध्ययन कर सकेंगे। इसमें आर्टिफिशियल (एआई) सेंटर होगा, जहां विद्यार्थियों को एआई का विस्तार से सकारात्मक रूप में इस्तेमाल करने का अवसर प्रदान किया जाएगा। एआई ट्रेंड में है, ऐसे में शोधार्थी भी नवाचार करने में इसे प्रयोग कर सकेंगे। सफल परिणाम को विवि प्रोत्साहित करेगा।
एक छत के नीचे विद्यार्थियों को थ्रीडी प्रिंटिंग, रोबोटिक्स, हाई कंप्यूटिंग, ऑगमेंटिड रिएलिटी (एआर), गेमिफिकेशन जैसी तकनीकों में दक्ष बनाया जाएगा। कुलपति प्रो. केपी सिंह के अनुसार हब को नई शिक्षा नीति के तहत विकसित किया जा रहा है। विवि व संबद्ध कॉलेजों के विभिन्न विभाग एक साथ डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल कर सकेंगे।
डिजिटल इंडिया को मिलेगा बढ़ावा
डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देते हुए हब का निर्माण पीएम उषा योजना के तहत किया जा रहा है, इसका शिलान्यास राज्यपाल ने कर दिया है। इसका उपयोग करते हुए शिक्षक अपनी शैक्षणिक सामग्री को डिजिटलीकृत व विषयों से संबंधित शिक्षण सामग्री का मॉड्यूल तैयार करेंगे। यहां शिक्षक भी खुद को तकनीकी रूप से अधिक अपडेट कर सकेंगे। आज के तकनीकी युग की शिक्षा और कौशल विकास को डिजिटल माध्यम, इन्फॉर्मेशन व कम्यूनिकेशन टेक्नोलॉजी (आईसीटी) साधन से सशक्त किया जाएगा।
नई तकनीक खोलेगी रोजगार के द्वार
विवि के विद्यार्थियों को एआर, वीआर और एआई तकनीक का हब के माध्यम से बारीकी से अध्ययन करने का मौका मिलेगा। वर्तमान में इन आधुनिक तकनीकों की विश्व भर में मांग है। विवि में विद्यार्थी पाठ्यक्रम के साथ इन विषयों में गहन जानकारी होने से रोजगार के लिए दावेदारी अधिक मजबूत कर सकेंगे। परिसर में बनने वाले हब में सौर ऊर्जा का उपयोग किया जाएगा। संवाद