बरेली। जिले के विभिन्न परिषदीय विद्यालयों की तरह यूपी बोर्ड के कुछ कॉलेजों में भी अब तक कक्षा एक से आठवीं तक किताबें नहीं पहुंच सकी हैं। विद्यार्थियों को पुरानी किताबों से ही काम चलाना पड़ रहा है। वहीं 11वीं और 12वीं कक्षा की एनसीईआरटी की किताबें भी छात्रों को बाजार में नहीं मिल रही हैं।
कुछ कॉलेजों में शिक्षक अपने स्तर से पुरानी किताबें देकर विद्यार्थियों की मदद कर रहे हैं। परिषदीय विद्यालयों के साथ ही इंटर कॉलेजों में भी बीएसए कार्यालय से किताबें भिजवाई जाती हैं। शासन का दावा है कि जिले में सभी किताबें भेज दी गई हैं, लेकिन यहां अभी उन्हें विद्यालयों तक नहीं पहुंंचाया जा सका है। इसलिए पुरानी किताबों से पढ़ाई चल रही है। वहीं एनसीईआरटी की किताबों के बारे में बड़ा बाजार के किताब विक्रेता अजय अग्रवाल ने बताया कि उन्हें अभी किताबें नहीं मिली हैं। ऐसे में 12वीं के विद्यार्थियों को अधिक समस्या हो रही हैं, क्योंकि उनकी पढ़ाई शुरु हो चुकी है।
जेब पर बोझ साबित हो रही अतिरिक्त स्टेशनरी
सीबीएसई की किताबें लेने के दौरान कई दुकानों पर अभिभावकों को पूरा सेट ही दिया जाता है। नया सत्र शुरु होने के पांच दिन बाद अब कुछ विक्रेता अभिभावकों को फुटकर किताबें बेच रहे हैं। डीडीपुरम निवासी रमेश ने बताया कि उन्होंने किताबों का पूरा सेट लिया है। उसमें किताबों के अलावा करीब एक हजार रुपये की ग्लू स्टिक, पेन, पेपर रोल, टेप, ज्यॉमेट्री बॉक्स, ट्यूब रंग आदि सामग्री भी शामिल है। इसे अलग नहीं किया जा रहा है। ऐसे में अभिभावकों को न चाहते हुए भी ये सामग्री खरीदनी पड़ रही है। पेरेंट्स फोरम के संयोजक मुहम्मद खालिद जीलानी ने बताया कि विक्रेता किताबें महंगी बेच रहे हैं। सेट के साथ अतिरिक्त सामान दिया जा रहा है, जिसे अभिभावक के लिए खरीदना जरूरी नहीं है। जिला प्रशासन को ऐसी दुकानों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
वर्जन...
विद्यालयों में किताबें पहुंचाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। जल्द सभी विद्यालयों में इनकी पूर्ति की जाएगी।
-संजय कुमार सिंह, बीएसए