बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय आज अपना 22वां दीक्षांत समारोह मना रहा है। वर्ष 1974 में एक अभूतपूर्व आंदोलन के बाद यह आकार ले पाया। इस आंदोलन का केंद्र बरेली कॉलेज था। इसमें स्थानीय छात्रों व शिक्षकों ने जुझारू भूमिका अदा की। आंदोलन में कई को लाठियां खानी पड़ीं। पुलिस की गोली से जाहिर हुसैन नाम के युवक की जान भी चली गई। उग्र आंदोलन के परिणाम स्वरूप सरकार को झुकना पड़ा। 20 जनवरी 1974 को शासन ने इस मांग को स्वीकार कर लिया।
छात्रों और शहरवासियों की इस मुहिम को अमर उजाला ने समय-समय पर प्रमुखता से प्रकाशित किया। अतीत के पन्नों को पलटने पर इसकी पुष्टि होती है। 10 जनवरी 1974 को प्रकाशित खबर के मुताबिक विश्वविद्यालय की स्थापना को लेकर चंदौसी में भी उग्र आंदोलन हुआ था। नगर पालिका, डाकघर, स्वास्थ्य अधिकारी के दफ्तर में तोड़फोड़ करने के साथ ही रेलवे स्टेशन पर प्रदर्शनकारियों ने एनसीसी के गार्डों से चार राइफलें, चार संगीन व 100 से अधिक कारतूस छीन लिए थे। पथराव में दो बसें क्षतिग्रस्त होने के साथ ही रेलवे पुलिस के थानाध्यक्ष और चार सिपाही भी घायल हुए थे।
बैनर छू जाने से मुख्यमंत्री की टोपी गिरी तो दागे गए थे आंसू गैस के गोले
स्वाधीनता संग्राम सेनानियों को ताम्रपत्र वितरित करने सात जनवरी 1974 को राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान पर आयोजित कार्यक्रम में तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा आए थे। विश्वविद्यालय स्थापना की मांग को लेकर गठित समिति की ओर से उनको ज्ञापन देने की योजना बनाई गई। छात्रों और शिक्षकों का हुजूम राजकीय इंटर कॉलेज पहुंचा तो बड़ी संख्या में जनसंघ के कार्यकर्ता भी पहुंच गए। काले झंडे दिखाने के दौरान बैनर छू जाने से मुख्यमंत्री की टोपी गिर गई थी। इस पर भीड़ से मची अफरा-तफरी के बीच पुलिस ने पंडाल के बाहर आंसू गैस के गोले दागे। बड़ी संख्या में छात्रों को गिरफ्तार करने के साथ शहर में भी कर्फ्यू लगा दिया गया था। इसी दौरान जाहिर हुसैन नाम का युवक पुलिस की गोली से मारा गया था।
वर्ष 1913 में उठी थी मांग
रुहेलखंड विश्वविद्यालय की वेबसाइट के मुताबिक विवि की स्थापना की मांग सबसे पहले 1913 में उठी थी। दिल्ली दरबार में बाबू राधे लाल व्यास ने अनुसूचित जाति के अधिकारों के लिए ज्ञापन देकर कलकत्ता विश्वविद्यालय की तरह रुहेलखंड विश्वविद्यालय स्थापित करने का सुझाव रखा। 1956 में बरेली से प्रताप चंद्र आजाद एमएलसी बनाए गए। उन्होंने भी रुहेलखंड विश्वविद्यालय बनाने का प्रस्ताव विधान परिषद में रखा, हालांकि यहां भी नाउम्मीदी ही हाथ लगी। अमर उजाला ब्यूरो