इन पर लगाए आरोप
रिपोर्ट में रितेश गोयल, कुशाग्र शर्मा, मानस खंडेलवाल और लतिका को नामजद किया गया है। ये सभी एमडी द्वितीय और तृतीय वर्ष के छात्र हैं। इनके अलावा कुछ अन्य छात्रों और कॉलेज प्रशासन पर भी आरोप लगाए गए हैं। सुधीर पाराशर का आरोप है कि कॉलेज ने आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। कॉलेज के प्रशासनिक अधिकारी आईए खान ने घटना के दिन सुधीर पाराशर को सूचित किया था। आशु पाराशर का 13 मई को सीएचसी नजीबाबाद में मेडिकल परीक्षण कराया गया। उसे सीटी स्कैन और अन्य जांचों के लिए बिजनौर जिला अस्पताल रेफर किया गया।
कमेटी ने दी रिपोर्ट, छुट्टी न मिलने से तनाव में था आशु
सुधीर पाराशर ने 15 मई को भोजीपुरा थाना प्रभारी को तहरीर देकर कार्रवाई का अनुरोध किया था। जिले के वरिष्ठ अधिकारियों से भी शिकायत की। तब डीएम ने एडीएम प्रशासन पूर्णिमा सिंह की अध्यक्षता में चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की थी। इसमें एसपी सिटी मानुष पारीक, एसडीएम सदर प्रमोद कुमार व तहसीलदार सदर शामिल थे। कमेटी ने विभिन्न बिंदुओं पर जांच की।
जांच कमेटी के मुताबिक, छुट्टी और काम के घंटों में राहत नहीं मिलने से छात्र तनाव में था। कई बार उसने अस्पताल प्रशासन से लिखित व मौखिक रूप से इसकी शिकायत भी की थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इससे आहत होकर उसने जान देने की कोशिश की। रैंगिंग के आरोप पर छात्र, उसके परिजनों व दोस्तों के बयान दर्ज किए गए लेकिन आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी है। जांच कमेटी की संस्तुति पर ही भोजीपुरा थाना पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की है।
कॉलेज प्रशासन ने साधी चुप्पी
मामले में कॉलेज प्रबंधन की ओर से कोई बयान जारी नहीं किया गया। कॉलेज प्रशासन के मुताबिक, इस मामले में उन्हें कुछ नहीं कहना है। विवेचना में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि जनसुनवाई के दौरान एक आवेदक ने इस मामले की शिकायत की थी। इस पर डीएम से पत्राचार किया गया, फिर एक संयुक्त कमेटी गठित कर प्रकरण की जांच कराई गई। जांच में प्राथमिक तौर पर आरोप सही पाए गए तो रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। विवेचना में जो स्थिति सामने आएगी, उसके मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।